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June 16, 2026

हिमाचल : 21 साल तक पाकिस्तान में की जासूसी, मंगाराम बोले- बुढ़ापे में सरकार ने छोड़ा साथ

35 साल देश को दिए- अब कोई नहीं पूछ रहा

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Mangaram Spy From Himachal Pakistan Espionage Indian SpyPrime Minister Narendra Modi

कांगड़ा। कुछ कहानियां इतिहास की किताबों में दर्ज नहीं होतीं, लेकिन उनमें देशभक्ति का वह दर्द छिपा होता है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के 66 वर्षीय मंगाराम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनका दावा है कि उन्होंने जिंदगी के कई साल देश की सुरक्षा के लिए दांव पर लगा दिए, लेकिन आज बुढ़ापे में न तो उन्हें कोई शौर्य पुरस्कार मिला और न ही आर्थिक सहारा।

पाकिस्तान में जासूसी करते थे मंगाराम

आपको बता दें कि मंगाराम, पुत्र इंद्र सिंह, तहसील इंदौरा के निवासी हैं। उनका कहना है कि वर्ष 1984 से 2005 तक वह देश के लिए जासूसी करते रहे और कई बार दुश्मन देश पाकिस्तान में जाकर अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने कभी गोलियों की परवाह नहीं की और देशहित को सर्वोपरि रखा।

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प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक लिखे पत्र

मंगाराम का कहना है कि उन्होंने आर्थिक सहायता और सम्मान की मांग को लेकर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्रियों को कई बार पत्र लिखे, लेकिन उन्हें कहीं से कोई राहत नहीं मिली। निराश होकर अब उन्होंने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए मीडिया का सहारा लिया है।

35 साल देश को दिए- अब कोई नहीं पूछ रहा

मंगाराम ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के 35 साल देश के नाम कर दिए। सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि समय आने पर आर्थिक सहायता और शौर्य पुरस्कार दिए जाएंगे, लेकिन काम निकलने के बाद उन्हें भुला दिया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उनके साथ ऐसा हुआ है तो भविष्य में देश के लिए इस तरह जोखिम उठाने के लिए कौन आगे आएगा।

 

21 साल तक पाकिस्तान में जासूसी करने वाले मंगाराम का छलका दर्द (जागरण फोटो)

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'दूसरे देशों में जासूसों को मिलता है सम्मान'

मंगाराम का कहना है कि अन्य देशों में अपने जासूसों को सम्मान और पुरस्कार दिए जाते हैं, लेकिन भारत में उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से मिलने की इच्छा जताई, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें मिलने का समय मिल पाएगा।

हमारे देश में जासूसी के क्या नियम हैं?

भारत में "जासूसी" से जुड़े नियम मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, गोपनीय सूचनाओं और विदेशी शक्तियों के लिए जानकारी जुटाने से संबंधित हैं। अगर कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा, सेना, रक्षा प्रतिष्ठानों या गोपनीय सरकारी सूचनाओं को अवैध रूप से प्राप्त करता है, साझा करता है या किसी विदेशी संस्था को पहुंचाता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाता है।

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मुख्य कानूनी प्रावधान

Official Secrets Act, 1923

  • भारत में जासूसी से जुड़े मामलों का प्रमुख कानून।
  • गोपनीय सरकारी दस्तावेज, सैन्य जानकारी या संवेदनशील सूचनाओं को बिना अनुमति प्राप्त करना, रखना या साझा करना अपराध है।
  • दोषी पाए जाने पर कई वर्षों की कैद हो सकती है।

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Bharatiya Nyaya Sanhita (पूर्व में IPC)

  • देश की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता के खिलाफ गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
  • कुछ मामलों में देशद्रोह जैसी गंभीर धाराओं के समान अपराधों के तहत भी जांच हो सकती है।

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National Investigation Agency और अन्य सुरक्षा एजेंसियां

  • जासूसी, आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच कर सकती हैं।
  • क्या-क्या जासूसी माना जा सकता है?
  • सैन्य ठिकानों की संवेदनशील जानकारी जुटाना।
  • गोपनीय सरकारी दस्तावेज चुराना या साझा करना।
  • विदेशी एजेंसियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना।
  • रक्षा परियोजनाओं या रणनीतिक प्रतिष्ठानों की प्रतिबंधित जानकारी एकत्र करना।

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