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June 16, 2026

हिमाचल: सरकारी रिकॉर्ड में मा*र दिया 'जिंदा' आदमी, बंद कर दी बेबस सुरेश की पेंशन; 9 साल से पड़ा है बिस्तर पर 

बेबस पत्नी काट रही दफ्तरों के चक्कर, बोल रही मेरा पति अभी जिंदा है

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mandi jairam thakur

मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को भी सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां प्रशासन की एक आत्मघाती और घोर लापरवाही एक लाचार व्यक्ति और उसके दाने-दाने को मोहताज परिवार पर भारी पड़ रही है।

 

जिस बीमारी ने एक हंसते-खेलते इंसान को बिस्तर पर सिर्फ सांसें लेने के लिए मजबूर कर दिया, बेरहम सिस्टम ने सरकारी कागजों में उसे जीते जी 'मौत' दे दी। जी हां, यह कड़वी सच्चाई है—प्रशासन ने एक जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित कर उसकी 'मुख्यमंत्री सहारा योजना' के तहत मिलने वाली पेंशन को बंद कर दिया है। यह दर्दनाक मामला सराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव छडय़ांद (डाकघर परवाड़ा, तहसील चच्योट) का है। यह वही क्षेत्र है जहां से प्रदेश के कद्दावर नेता और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का गहरा नाता है।

 

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मृत बताकर बंद कर दी सहारा योजना की पेंशन

पीडि़त सुरेश कुमार पिछले 9 वर्षों से बिस्तर से नहीं उठ पाए हैं। वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र के क्रूर पोर्टल ने उन्हें 'मृत' घोषित कर दिया है। जब सुरेश का पूरा परिवार गंभीर आर्थिक तंगी और गरीबी के दलदल में बेहाल हो चुका है, तब सहारा देने वाली सरकारी योजना ने ही उनका साथ छोड़ दिया। सुरेश अभी बिस्तर पर जिंदा लेटा अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है, जबकि उसकी पत्नी सायना देवी अपने दो बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) के पेट पालने और पति को न्याय दिलाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं।

पेड़ से गिरे तो टूट गई रीढ़

सुरेश कुमार की पत्नी सायना देवी ने रोते हुए अपनी जो आपबीती सुनाई, उसने सुनने वाले हर शख्स की आंखें नम कर दीं। करीब नौ वर्ष पहले एक पेड़ से गिरने के कारण सुरेश की रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद वह धीरे-धीरे पूरी तरह अपंगता की स्थिति में चले गए। आज आलम यह है कि उनके हाथ-पैर काम नहीं करते और वह बोलने की क्षमता भी खो चुके हैं।

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सुरेश के इलाज से कर्ज में डूबा परिवार

बेबस पत्नी ने पति को ठीक करने के लिए जमीन-आसमान एक कर दिया। जोनल अस्पताल मंडी से लेकर श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक, और वहां से पीजीआई चंडीगढ़ और शिमला के चक्कर काटे। डॉक्टरों के कहने पर महीनों फिजियोथेरेपी करवाई। इलाज के इस लंबे और थका देने वाले चक्र ने इस गरीब परिवार को कर्ज के गहरे बोझ तले दबा दिया, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई।

नेता प्रतिपक्ष के द्वार पहुंचा पीड़ित परिवार

यह चौंकाने वाली दास्तां तब उजागर हुई जब यह बेहाल परिवार राहत की उम्मीद में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से मिलने उनके तांदी स्थित आवास पर पहुंचा। पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू की गई 'मुख्यमंत्री सहारा योजना' से सुरेश को हर महीने जो आर्थिक मदद मिलती थी, उससे दवाइयों और बच्चों की पढ़ाई का खर्च चलता था। वर्तमान कार्यकाल में हुए इस फर्जीवाड़े पर गहरी नाराजगी जताते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि जो व्यक्ति जिंदा है, उसे सरकारी तंत्र ने कागजों में मारकर रख दिया है, यह बेहद गंभीर और अमानवीय है।

 

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मौके पर ही कड़े निर्देश 

मामले की गंभीरता को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने तुरंत मौके से ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दूरभाष पर जमकर फटकार लगाई और कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस अक्षम्य और अमानवीय गलती को तुरंत सुधारा जाए और पीड़ित सुरेश कुमार की सहारा पेंशन को तत्काल बहाल किया जाए। इसके साथ ही जयराम ठाकुर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार को मौके पर ही अपनी जेब से 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता राशि प्रदान की और भविष्य में बच्चों की पढ़ाई व इलाज के लिए हरसंभव मदद का पूरा भरोसा दिलाया।

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डॉ. साधना ठाकुर देंगी 'एयरबेड' से शारीरिक राहत

पूर्व मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी एवं भारतीय रेडक्रॉस प्रबंधन समिति की राष्ट्रीय सदस्य डॉ. साधना ठाकुर ने भी इस मामले में त्वरित संवेदनशीलता दिखाई। बिस्तर पर पड़े-पड़े घाव झेल रहे सुरेश कुमार को शारीरिक तकलीफ से राहत पहुंचाने के लिए उन्होंने अपनी ओर से एक आरामदायक 'एयरबेड' (Airbed) तुरंत उपलब्ध करवाने की घोषणा की है। यह घटना प्रदेश के लाभार्थी सत्यापन तंत्र और डिजिटल इंडिया के दावों के बीच जमीनी स्तर पर बैठी प्रशासनिक सुस्ती पर एक बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लगाती है।

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