शिमला। हिमाचल प्रदेश में जनसेवाओं की याद अक्सर चुनावी मौसम में ही आती है। जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, नेता और अधिकारी गांवों की ओर बढ़ते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद सालों तक लोगों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता। इसका जीता-जागता उदाहरण जिला शिमला के रामपुर क्षेत्र से सामने आया है।

सड़क के लिए तरस रहे लोग

यहां कुल्लू सीमा से सटा एक गांव आजादी के 76 वर्षों बाद भी सड़क के लिए तरस रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को मरीजों को पीठ पर उठाकर खड़ी ढलानों और संकरी पगडंडियों से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। बुनियादी सड़क सुविधा ना होने के कारण जनता सरकार से बेहद नाराज है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास : लगातार 3 घंटे तक चली जटिल सर्जरी, महिला के पेट से निकाला 5 KG...

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

आपको बता दें गांव की कुशवा पंचायत के शाहदोहरी गांव की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस वीडियो ने स्पष्ट दिख रहा है कि सड़क ना होने के कारण लोगों को मजबूरी में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

पीठ पर ढोए जा रहे मरीज

वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह एक महिला को चारपाई या पीठ पर उठाकर खड़े रास्तों और संकरी पगडंडियों से अस्पताल ले जा रहे हैं। रास्ता इतना मुश्किल है कि जरा सा संतुलन बिगड़ने पर बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में सरकारी मदद कहीं दिखाई नहीं देती।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : क्लासरूम में बच्चों के सामने गिरे शिक्षक, अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ दिया दम

गांव तक नहीं पहुंच पाती एंबुलेंस

लोगों का कहना है कि सड़क न होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है और अस्पताल काफी दूर है। ऐसे में गांव के लोग आपस में एक-दूसरे की मदद से ही मरीज को अस्पताल तक पहुंचाते हैं। कई बार तो घंटों पैदल चलकर मरीज को इलाज के लिए ले जाना पड़ता है, जिससे मरीज और उसे उठाने वाले दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

सड़क ना होने से हर दिन  मुश्किल

सड़क न होने की परेशानी केवल मरीजों तक ही सीमित नहीं है। गांव के लोगों को राशन, दवाइयां और रोजमर्रा का जरूरी सामान भी पीठ पर ढोकर लाना पड़ता है। बरसात और बर्फबारी के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह रास्ता किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल के राशन कार्ड धारकों को राहत, 5 महीने बाद डिपुओं में मिलेगा रिफाइंड तेल

चुनाव आते ही वादे, बाद में सन्नाटा  

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई सालों से सड़क बनाने की मांग करते आ रहे हैं। हर बार नेता और अधिकारी आश्वासन तो देते हैं, लेकिन आज तक गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। चुनाव के समय जरूर नेता गांव पहुंचते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याएं फिर नजरअंदाज कर दी जाती हैं।

ग्रामीणों ने दी नोटा की चेतावनी

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को साफ तौर पर बता दिया है कि उन्हें अब सड़क चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मांग की है कि शाहदोहरी गांव को जल्दी सड़क से जोड़ा जाए। लोगों का कहना है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई, तो आने वाले चुनावों में वे वोट तो देंगे, लेकिन किसी भी नेता को नहीं, सिर्फ नोटा को चुनेंगे। यह चेतावनी सरकार और प्रशासन के लिए एक गंभीर संदेश मानी जा रही है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें