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January 18, 2026

हिमाचल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास : लगातार 3 घंटे तक चली जटिल सर्जरी, महिला के पेट से निकाला 5 KG...

मरीज की हालत स्थिर, तेजी से हो रही रिकवरी

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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिला मुख्यालय के समीप गुटकर स्थित मांडव अस्पताल में एक ऐसी जटिल और ऐतिहासिक सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया, जिसने न केवल प्रदेश बल्कि देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

महिला के पेट से निकाला 5 KG...

यहां एक महिला मरीज के गर्भाशय से 5.21 किलोग्राम वजनी विशाल फाइब्रॉएड को शुद्ध लैप्रोस्कोपिक विधि से सफलतापूर्वक निकाल दिया गया- जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है।

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3 घंटे तक चली जटिल सर्जरी

यह चुनौतीपूर्ण सर्जरी वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ एवं एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. उदय भानु राणा ने अपनी अनुभवी चिकित्सा टीम के साथ मिलकर की। सर्जरी में लगभग ढाई से तीन घंटे का समय लगा।

 

Fibroid laparoscopic surgery mandav hospital

ओपन सर्जरी नहीं, लैप्रोस्कोपिक...

फाइब्रॉएड का आकार और वजन इतना अधिक था कि सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में ओपन सर्जरी को ही विकल्प माना जाता है। मगर डॉक्टरों की टीम ने आधुनिक तकनीक और उच्च कौशल के बल पर इसे लैप्रोस्कोपिक तरीके से ही सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

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पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा

चिकित्सा साहित्य के अनुसार, भारत में इससे पहले लैप्रोस्कोपिक विधि से निकाले गए सबसे बड़े फाइब्रॉएड का वजन करीब 4.5 किलोग्राम दर्ज किया गया था। ऐसे में 5.21 किलोग्राम वजनी फाइब्रॉएड को पूरी तरह लैप्रोस्कोपिक तकनीक से निकालना एक नया चिकित्सा रिकॉर्ड माना जा रहा है।

 

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किन चुनौतियों का करना पड़ा सामना?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्जरी विश्व स्तर पर भी न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी की सबसे बड़ी और जटिल उपलब्धियों में गिनी जा सकती है। डॉ. उदय भानु राणा के अनुसार, इस तरह की सर्जरी में कई गंभीर चुनौतियां होती हैं। इसके बावजूद सटीक योजना, अत्याधुनिक उपकरणों और अनुभवी टीम के समन्वय से सर्जरी को पूरी सुरक्षा के साथ पूरा किया गया। सर्जरी में ऐसी कई गंभीर चुनौतियां आती हैं, जैसे कि-

  • अत्यधिक वजन और आकार के कारण अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा
  • आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचने की आशंका
  • सीमित ऑपरेटिव स्पेस सबसे बड़ी मुश्किलें होती हैं

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मरीज की हालत स्थिर, तेजी से रिकवरी

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार महिला मरीज तेजी से स्वस्थ हो रही है और उसे किसी प्रकार की जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा। लैप्रोस्कोपिक विधि होने के कारण मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और शीघ्र रिकवरी का लाभ मिला है।

डॉक्टरों ने रचा इतिहास

इस ऐतिहासिक उपलब्धि से मांडव अस्पताल ही नहीं, बल्कि पूरा मंडी जिला चिकित्सा क्षेत्र के मानचित्र पर एक नई पहचान बना रहा है। यह सर्जरी इस बात का प्रमाण है कि अब छोटे शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों में भी विश्वस्तरीय और अत्यंत जटिल सर्जरी संभव हो रही है।

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चिकित्सा को मिलेगी नई दिशा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। इससे मरीजों को कम जोखिम, कम दर्द, कम अस्पताल प्रवास और तेजी से सामान्य जीवन में लौटने का लाभ मिलेगा।

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