चंबा। हिमाचल प्रदेश में आई आपदा के बीच नदियों में लकड़ियों के बहते स्लीपर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भी इस मामले पर सवाल उठाए हैं।
नदी-नालों के किनारे बसना चिंताजनक
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल बोले कि हिमाचल में आपदा के दौरान नदियों में स्लीपर बहकर आए। इससे साबित होता है कि जंगलों का अवैध कटान हुआ है। उन्होंने ये भी कहा कि ये चिंताजनक है कि कई लोग नदी-नालों के किनारे बसे हुए थे।
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हिमाचल की मदद के लिए सोच रहे PM
राज्यपाल बोले कि प्रधानमंत्री मोदी केंद्र की टीमों द्वारा नुकसान का आकलन कर हिमाचल की मदद के बारे में सोच रहे हैं। वे बोले कि आपदा में लोगों के घरों और जमीनों को बहुत नुकसान हुआ है। कई परिवारों के पास जमीन ही नहीं बची है। कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
पुनर्वास हेतु की जाएगी हर संभव व्यवस्था
उन्होंने कहा कि प्रदेश में वन भूमि है और जब तक संबंधित विभाग से अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक थोड़ा कष्ट होगा। आपदा से प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए हर संभव व्यवस्था की जाएगी।
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जताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार
राज्यपाल शुक्ल ने केंद्र से राज्य को मिले 1500 करोड़ पर प्रधानमंत्री मोदी का आभार भी जताया। बता दें कि राज्यपाल ने डलहौजी की बनीखेत पंचायत में आपदा प्रभावित लोगों के लिए खा्दय और सामग्री बांटी।
प्रभावितों ने राज्यपाल से मांगी जमीन
इस दौरान ककीयाना गांव के आपदा प्रभावित लोगों ने पुनर्वास के लिए राज्यपाल से जमीन मांगी। राज्यपाल ने प्रभावितों को हर संभव मदद दिलवाने का विश्वास दिया। गौरतलब है कि हिमाचल में आई आपदा ने सैंकड़ोंं लोगों को बेघर कर दिया है। अब ये लोग नहीं जानते कि वो किसे अपना घर कहें।
