चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के कई गांव आज भी सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। चुराह विधानसभा क्षेत्र की गुइला पंचायत के कई गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए इंतजार कर रहे हैं।
सड़क सुविधा को तरस रहे लोग
भनौड़ी, अलवास, अयूंडा और गुइला क्षेत्र में करीब 3500 लोग रहते हैं। इनमें से अलवास तक सड़क पहुंच गई है। मगर इसके आगे बसे गांवों के लोगों को अब भी पैदल पगडंडियों और मुश्किल पहाड़ी रास्तों का सहारा लेना पड़ता है।
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शव घर पहुंचाने में होती है दिक्कत
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की कमी ने रोजमर्रा के जीवन से लेकर आपात परिस्थितियों तक उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सबसे गंभीर स्थिति किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर सामने आती है। परिवार को शव को घर तक पहुंचाने के लिए कई किलोमीटर का कठिन रास्ता तय करना पड़ता है।
4-5 KM चलना पड़ता है पैदल
ग्रामीणों के अनुसार अलवास से आगे करीब चार से पांच किलोमीटर तक खड़ी चढ़ाई है। ऐसे रास्ते पर शव को कंधे या पीठ के सहारे ले जाना पड़ता है। दुख की घड़ी में परिवार और ग्रामीणों के लिए यह सफर बेहद कठिन हो जाता है।
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सामान पहुंचाने के लिए खच्चरों का सहारा
सड़क न होने का असर गांवों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। राशन, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की जरूरत का सामान पैदल रास्तों से गांव तक पहुंचाना पड़ता है। वहीं घर बनाने या मरम्मत के लिए सीमेंट, सरिया और दूसरी निर्माण सामग्री खच्चरों के जरिए पहुंचाई जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक एक खच्चर का किराया करीब 250 रुपये तक देना पड़ता है। इससे सामान खरीदने के बाद उसे घर तक लाने का खर्च अलग से जुड़ जाता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी असर
ग्रामीणों के अनुसार सड़क की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की सुविधा पर भी पड़ रहा है। किसी व्यक्ति के बीमार होने पर उसे स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना आसान नहीं होता। पहले मरीज को पैदल रास्ते से नीचे लाना पड़ता है और उसके बाद वाहन मिल पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सुविधाओं की कमी के कारण कुछ परिवार गांव से बाहर रहने को मजबूर हुए हैं।
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ऐतिहासिक पहचान वाला इलाका
भनौड़ी का क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 1952 में हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार यहां पहुंचे थे। पुराने समय में यह इलाका पांगी, जांस्कर, लद्दाख, लाहौल-स्पीति और तिब्बत की ओर जाने वाले यात्रियों के रास्ते में पड़ता था। बौद्ध-खांपा संस्कृति और स्थानीय परंपराओं के कारण भी इस क्षेत्र की अलग पहचान है।
वन मंजूरी और बजट का इंतजार
चुराह विधायक हंसराज के अनुसार अलवास तक सड़क पहुंच चुकी है और आगे सड़क विस्तार की योजना है। इसके लिए बजट की व्यवस्था अभी बाकी है। साथ ही वन विभाग से संबंधित मंजूरी भी लंबित है।
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CM के सामने रखेंगे बात
कांग्रेस नेता यशवंत खन्ना ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने रखने की बात कही है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा के अनुसार अलवास से भनौड़ी तक सड़क निर्माण का एफसीए मामला वन विभाग को भेजा गया है।
