बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के क्षेत्रीय अस्पताल में इलाज करवाने वाले मरीजों के लिए अब जांच से जुड़ा एक अहम बदलाव किया गया है। अस्पताल की सरकारी लैब में जिन जांचों के लिए अब तक मरीजों से कोई पैसा नहीं लिया जाता था- उनमें से निर्धारित टेस्ट के लिए अब शुल्क देना होगा।
सरकारी अस्पताल में नहीं होंगे फ्री टेस्ट
अस्पताल प्रबंधन ने इस संबंध में प्रक्रिया शुरू कर दी है और मरीजों से फीस लेने का काम भी शुरू हो गया है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने आर्थिक रूप से बेहद कमजोर और जरूरतमंद मरीजों के लिए राहत का प्रावधान रखा है। विशेष परिस्थितियों में मरीज की आर्थिक स्थिति और जरूरत को देखते हुए जांच शुल्क माफ किया जा सकता है।
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इलाज के साथ जांच का खर्च भी बढ़ेगा
सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब पहले की तुलना में जांच पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। खासतौर पर ऐसे मरीज जो कम आय वाले परिवारों से आते हैं, उनके लिए यह बदलाव आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है।
मरीजों पर पड़ा बोझ
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह फैसला मरीजों पर बोझ डालने के उद्देश्य से नहीं लिया गया है। सरकारी लैब की सेवाओं को लगातार जारी रखने और उसके संचालन से जुड़ी वित्तीय परेशानियों को दूर करने के लिए शुल्क व्यवस्था लागू की गई है।
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बढ़ती जा रही देनदारी
चिकित्सा अधीक्षक बिलासपुर एके सिंह के अनुसार, सरकारी लैब पर लंबे समय से वित्तीय देनदारी बढ़ती जा रही थी। इस वजह से लैब की सेवाएं पहले कुछ समय के लिए प्रभावित भी हुई थीं।
समस्या का समाधान ही यही
प्रबंधन के सामने एक तरफ मरीजों को लगातार जांच सुविधा उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी थी। जबकि दूसरी तरफ लैब के खर्च और बढ़ती देनदारी को संभालना चुनौती बन रहा था। इसी समस्या के समाधान के लिए शुल्क लेने का प्रस्ताव तैयार किया गया।
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बैठक में लिया गया फैसला
अस्पताल प्रशासन ने सरकारी लैब में जांच के लिए शुल्क लागू करने का प्रस्ताव रोगी कल्याण समिति यानी आरकेएस की बैठक में रखा था। बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाया।
नए शुल्क किए तय
नई व्यवस्था के तहत पहले निशुल्क होने वाली निर्धारित जांचों के लिए भी तय शुल्क लिया जाएगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वर्तमान में लैब में मरीजों के लिए सभी प्रकार की जांच की सुविधा उपलब्ध है।
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सेवाओं पर पड़ रहा असर
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि लैब को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी संसाधनों और अन्य खर्चों की लगातार जरूरत होती है। लंबे समय तक बढ़ती देनदारी के कारण सेवाओं पर असर पड़ने की स्थिति पैदा हो रही थी।
खर्चों को संभालने में मिलेगी मदद
प्रशासन को उम्मीद है कि जांच के लिए शुल्क निर्धारित होने के बाद लैब से जुड़े खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी। इससे जांच सेवाएं बिना रुकावट जारी रखने में भी सहूलियत होगी और भविष्य में वित्तीय संकट के कारण मरीजों को परेशानी का सामना कम करना पड़ेगा।
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गरीब मरीजों के लिए क्या?
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को दी जाने वाली राहत है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, हर मरीज से परिस्थितियों को नजरअंदाज कर शुल्क नहीं लिया जाएगा।
किसको मिलेगा फ्री इलाज?
अगर कोई मरीज बेहद गरीब या जरूरतमंद है और जांच का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है, तो उसकी परिस्थिति को देखते हुए शुल्क में छूट दी जा सकती है। विशेष मामलों में मरीज की जांच निशुल्क किए जाने का भी प्रावधान रखा गया है।
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इसके लिए संबंधित मरीज की आर्थिक स्थिति और उसकी चिकित्सा जरूरत को ध्यान में रखा जाएगा। यानी शुल्क व्यवस्था लागू होने के बावजूद जरूरतमंद मरीजों के लिए अस्पताल प्रशासन के स्तर पर राहत का विकल्प मौजूद रहेगा।
मरीजों को समझना होगा....
क्षेत्रीय अस्पताल में जांच करवाने वाले मरीजों के लिए अब नई शुल्क व्यवस्था को समझना जरूरी होगा। जिन जांचों के लिए पहले कोई भुगतान नहीं करना पड़ता था, उनके लिए अब निर्धारित शुल्क लिया जा सकता है।
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मरीजों को मिल सके सुविधा
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य लैब की सेवाओं को वित्तीय रूप से स्थिर बनाना है- ताकि मरीजों को जांच की सुविधा लगातार मिलती रहे। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राहत देने का फैसला इस व्यवस्था में मानवीय पक्ष को बनाए रखने के लिए किया गया है।
