#अव्यवस्था
August 18, 2026
गगल एयरपोर्ट के पास जमीन का खेल? महिला के नाम पर हुई खरीद- विजिलेंस जांच में बड़े खुलासे
गगल एयरपोर्ट क्षेत्र में कथित बेनामी भूमि सौदों से जुड़ा दूसरा मामला है
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा स्थित गगल एयरपोर्ट के आसपास जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर विजिलेंस की जांच अब एक और मामले तक पहुंच गई है। एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में कथित बेनामी भूमि सौदे की जांच के दौरान विजिलेंस ने एक्शन लिया है।
विजिलेंस ने धर्मशाला थाने में दंपती, एक फर्म संचालक और पटवार वृत्त खोली के तत्कालीन पटवारी के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि कृषक होने का प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए महिला ने अपनी पहचान और वैवाहिक संबंधों से जुड़ी गलत जानकारी दी और इसी आधार पर लाखों की जमीन खरीदने का रास्ता तैयार किया गया।
यह गगल एयरपोर्ट क्षेत्र में कथित बेनामी भूमि सौदों से जुड़ा दूसरा मामला है। विजिलेंस अब जमीन खरीदने से लेकर कृषक प्रमाणपत्र हासिल करने, राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने और जमीन की रकम के भुगतान तक की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
विजिलेंस की जांच के अनुसार, संबंधित महिला ने मई 2020 में कृषक प्रमाणपत्र हासिल किया था। प्रमाणपत्र में उसने खुद को टांडा के कछियारी निवासी एक व्यक्ति की पत्नी बताते हुए कृषक के तौर पर दर्शाया।
मगर जब राजस्व रिकॉर्ड की जांच की गई तो सामने आया कि जिस व्यक्ति की पत्नी होने का दावा प्रमाणपत्र में किया गया था, उसकी वास्तविक पत्नी का नाम कुछ और दर्ज है। यानी महिला की ओर से प्रमाणपत्र में दी गई पहचान और वैवाहिक संबंधों से जुड़ी जानकारी प्रथमदृष्टया गलत पाई गई।
इसी प्रमाणपत्र के आधार पर महिला ने महाल कोहाला खास में कृषि भूमि खरीदी। इसके बाद इसी खरीद को आधार बनाकर उसने एक और कृषक प्रमाणपत्र हासिल किया।
विजिलेंस के अनुसार, दूसरे कृषक प्रमाणपत्र के आधार पर मई 2023 में महाल पटारकर, पटवार वृत्त मटौर में 0-08-10 हेक्टेयर भूमि खरीदी गई। जांच में अब यह भी देखा जा रहा है कि इन जमीन सौदों के पीछे वास्तविक धन किसका था और जमीन खरीदने के लिए भुगतान किसने किया।
जांच का सबसे अहम पहलू जमीन की खरीद में इस्तेमाल हुई रकम को लेकर सामने आया है। विजिलेंस के मुताबिक महिला के नाम खरीदी गई जमीन का भुगतान उसके अपने बैंक खाते से नहीं किया गया।
आरोप है कि जमीन की रकम परिवार के एक सदस्य के नाम पर संचालित फर्म के बैंक खाते से चेक और नकद के जरिए दी गई। इसी वजह से विजिलेंस अब फर्म के बैंक खातों और पूरे लेनदेन की जांच कर रही है।
मामले में पटवार वृत्त खोली के तत्कालीन पटवारी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि गलत जानकारी सामने होने के बावजूद कृषक प्रमाणपत्र से जुड़े राजस्व दस्तावेज तैयार करने और उनके सत्यापन में मदद की गई।
विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कृषक प्रमाणपत्र तैयार करने और जारी करने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी। जरूरत पड़ने पर मामले में अन्य अधिकारियों या व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
विजिलेंस की जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि गलत या कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कृषक का दर्जा हासिल कर जमीन खरीदना हिमाचल प्रदेश भू-जोत एवं काश्तकारी भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ सकता है।
अब विजिलेंस राजस्व रिकॉर्ड, कृषक प्रमाणपत्रों की फाइलें, बिक्री विलेख, इंतकाल, बैंक खातों और जमीन खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत की जांच करेगी। साथ ही संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
गगल एयरपोर्ट के आसपास जमीनों की खरीद को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच यह दूसरी FIR महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब जांच का फोकस सिर्फ जमीन किसके नाम खरीदी गई, इस पर नहीं बल्कि किसने पैसा लगाया, कृषक प्रमाणपत्र कैसे हासिल हुआ और सरकारी रिकॉर्ड में उसे किस आधार पर सही ठहराया गया, इन सवालों पर भी रहेगा।