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August 20, 2026
हिमाचल: मिड-डे मील की खीर खाने से 47 बच्चे बीमार,अभी भी अस्पताल में भर्ती- शिक्षा विभाग में हड़कंप
फूड पॉइजनिंग की आशंका, रिपोर्ट का इंतजार
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूल में बच्चों को परोसा गया मिड-डे मील अचानक सवालों के घेरे में आ गया। खीर खाने के कुछ ही समय बाद बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें अस्पताल पहुंचाना पड़ा। मामला कुल्लू के पतलीकूहल स्थित बाड़ी प्राथमिक स्कूल का है, जहां मिड-डे मील की खीर खाने के बाद 47 बच्चों के बीमार पड़ने की सूचना सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब जांच शुरू कर दी है।
बच्चों के बीमार पड़ने के मामले की जांच एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा को सौंपी गई है। प्रशासन ने अभिभावकों की मांग पर कार्रवाई करते हुए मिड-डे मील में इस्तेमाल की गई खाद्य सामग्री और पानी के सैंपल भी एकत्र किए हैं। इन सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी।
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स्वास्थ्य विभाग, जल शक्ति विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुल 13 सैंपल लिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने खीर में इस्तेमाल की गई सामग्री के पांच सैंपल, जल शक्ति विभाग ने पानी के पांच सैंपल और स्वास्थ्य विभाग ने तीन सैंपल लिए हैं। इसके अलावा बच्चों के स्टूल, यूरिन और उल्टी के सैंपल भी लिए गए हैं, ताकि बीमारी के कारणों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा सके।
मामले में शिक्षा विभाग ने भी अपने स्तर पर विभागीय जांच शुरू कर दी है। डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन ज्ञान चंद के अनुसार विभागीय टीम स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने से लेकर बच्चों को परोसने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
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विभाग का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार को बाड़ी प्राथमिक स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील के तहत खीर परोसी गई थी। खीर खाने के बाद बच्चों को उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। इसके बाद बच्चों को उपचार के लिए सीएचसी पतलीकूहल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर कुछ बच्चों को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू भी रेफर किया गया।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के अनुसार 47 बच्चों में से 44 को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है, जबकि तीन बच्चों का उपचार जारी है। उन्होंने कहा है कि जांच में यदि कोई लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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प्रारंभिक तौर पर बच्चों के बीमार पड़ने को फूड पॉइजनिंग से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआती जांच में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी आशंका जताई गई है। इसलिए पानी और खाद्य सामग्री दोनों के सैंपल लिए गए हैं।
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सीएमओ कुल्लू डॉ. रणजीत ठाकुर के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने बाड़ी और आसपास के गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। आशा वर्करों को भी सक्रिय किया गया है और जरूरतमंद लोगों के लिए दवाइयों की व्यवस्था की गई है। लोगों से अपील की गई है कि बच्चों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें और चिकित्सकीय सहायता लें।
बच्चों के बीमार पड़ने के बाद अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि खीर खाने के बाद ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी, इसलिए मिड-डे मील तैयार करने और उसमें इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच जरूरी है।
पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने भी अस्पताल पहुंचकर बीमार बच्चों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
फिलहाल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की जांच जारी है। खाद्य सामग्री, पानी और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर खीर खाने के बाद इतने बच्चों की तबीयत एक साथ क्यों बिगड़ी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।