#अव्यवस्था
August 14, 2026
बदहाली: IGMC में कैंसर मरीजों के इलाज पर संकट, दवाइयां खत्म- बाजार से खरीदने को मजबूर
मरीजों को मजबूरन महंगी दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही हैं
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शिमला। कैंसर से जंग लड़ रहे मरीजों के लिए इलाज की राह पहले ही आसान नहीं होती। मगर जब अस्पताल में इलाज के दौरान जरूरी दवाएं भी उपलब्ध न हों तो यह लड़ाई और मुश्किल हो जाती है।
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला में कुछ कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए आवश्यक दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में संबंधित दवाओं की उपलब्धता खत्म होने के कारण मरीजों के परिजनों को निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ रहा है। इससे एक तरफ इलाज जारी रखने की चिंता है तो दूसरी तरफ हजारों रुपये के अतिरिक्त खर्च का बोझ भी बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार कीमोथेरेपी के दौरान इस्तेमाल होने वाली कुछ जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को डॉक्टर की ओर से लिखी गई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
मरीजों और उनके तीमारदारों के मुताबिक एक कीमोथेरेपी सत्र के दौरान बाहर से दवाएं लेने पर करीब छह हजार रुपये तक खर्च हो रहे हैं। कैंसर का इलाज कई चरणों में चलता है, इसलिए बार-बार होने वाला यह खर्च आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन रहा है।
कई परिवारों के लिए कैंसर का इलाज पहले ही आर्थिक दबाव वाला होता है। आने-जाने, जांच और अन्य जरूरतों के खर्च के बीच महंगी दवाएं अलग से खरीदना उनके बजट को प्रभावित कर रहा है।
मरीजों की परेशानी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज की सुविधा मिलने के बावजूद कुछ आवश्यक दवाओं के लिए उन्हें अपनी जेब से भुगतान करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि यदि कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली सभी जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध रहें तो उन्हें निजी दुकानों से महंगी दवाएं खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि गंभीर बीमारी के बीच सबसे बड़ी चिंता इलाज को समय पर जारी रखने की होती है। ऐसे में दवाओं के लिए अस्पताल से बाहर जाना और हजारों रुपये खर्च करना उनके लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रहा है।
अस्पताल में इलाज करवा रहे मरीजों के परिजनों ने बताया कि कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल से कुछ दवाएं मिल रही हैं, लेकिन महंगी और जरूरी दवाओं का इंतजाम बाहर से करना पड़ रहा है। एक मरीज के साथ आए संतोष ने बताया कि कीमोथेरेपी के दौरान बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं और महंगी दवाओं का खर्च खुद उठाना पड़ रहा है।
कैंसर मरीजों के लिए कीमोथेरेपी एक बार की प्रक्रिया नहीं होती। बीमारी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार मरीजों को कई सत्रों से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे में अगर प्रत्येक सत्र के दौरान हजारों रुपये की दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ें तो कुल खर्च काफी बढ़ जाता है। खासकर उन परिवारों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है।
मरीजों और उनके स्वजन ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाओं की उपलब्धता नियमित रूप से सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल आने के बाद दवाओं के इंतजाम में इधर-उधर न भटकना पड़े और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उन्हें वास्तविक रूप से मिल सके।