#अव्यवस्था
August 19, 2026
हिमाचल के सरकारी स्कूल में खीर खाने से बिगड़ी 40 बच्चों की तबीयत, अस्पताल में मचा हड़कंप
एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचे अस्पताल
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के नग्गर में मिड-डे मील को लेकर हड़कंप मच गया। बाड़ी प्राइमरी स्कूल में मंगलवार को मिड-डे मील में परोसी गई खीर खाने के बाद करीब 30 से 40 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। छुट्टी के बाद घर पहुंचे बच्चों को उल्टी, कमजोरी और दूसरी दिक्कतें होने लगीं, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, बाड़ी प्राइमरी स्कूल में मंगलवार को बच्चों को मिड-डे मील में खीर परोसी गई थी। जैंडी, बाड़ी, बशकोला, रंखड़ू और बाजगाड़ी समेत आसपास के गांवों के बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं।
बताया जा रहा है कि शाम करीब चार बजे छुट्टी होने के बाद बच्चे अपने घर पहुंचे तो कई बच्चों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। कुछ बच्चों के स्कूल के बाहर ही अर्धमूर्छित अवस्था में गिरने की भी सूचना है।
बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही पंचायत प्रधान कमलाकांत और उपप्रधान ललित मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने में मदद की। देखते ही देखते बड़ी संख्या में अभिभावक भी CHC पतलीकूहल पहुंच गए।
बच्चों का उपचार कर रहे चिकित्सक डॉ. मोहित शर्मा ने प्रारंभिक तौर पर इसे फूड प्वाइजनिंग का मामला बताया है। चिकित्सकों ने दूषित पानी को भी इसकी संभावित वजह माना है। हालांकि, बच्चों की तबीयत खराब होने की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

बीएमओ नग्गर कर्ण ने बताया कि सीएचसी पतलीकूहल में बच्चों का उपचार किया जा रहा है। चिकित्सकों की टीम बच्चों की लगातार निगरानी कर रही है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद मनाली विधायक भुवनेश्वर गौड़ भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की और चिकित्सकों से बच्चों की स्थिति की जानकारी ली।
एक साथ 30 से 40 बच्चों के बीमार पड़ने से क्षेत्र में चिंता का माहौल है। बच्चों के परिजनों ने मामले की पूरी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मिड-डे मील में इस्तेमाल की गई खाद्य सामग्री और पानी के सैंपल लिए जाने चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या रही।
परिजनों ने प्रशासन से स्कूल में मिड-डे मील की गुणवत्ता और साफ-सफाई व्यवस्था की भी जांच करवाने की मांग उठाई है। फिलहाल बच्चों का अस्पताल में उपचार जारी है और जांच के बाद ही मामले की असली वजह सामने आएगी।