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August 21, 2026

हिमाचल में खड़ी कार का जयपुर में कटा चालान : गाड़ी और नंबर का भी नहीं मेल

करीब दो महीने से घर के पास खड़ी है कार

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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक कार मालिक उस समय हैरान रह गया, जब उसके मोबाइल फोन पर राजस्थान के जयपुर में उसकी गाड़ी का चालान कटने का संदेश पहुंचा। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब संदेश में चालान को कोर्ट भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई।

हिमाचल में खड़ी कार का जयपुर में कटा चालान

कार मालिक का कहना है कि उसकी गाड़ी पिछले करीब दो महीने से घर के पास खड़ी है और इस दौरान वह हिमाचल प्रदेश से बाहर गई ही नहीं। मामले की जानकारी मिलने के बाद जब चालान की पूरी डिटेल निकलवाई गई तो एक और चौंकाने वाली बात सामने आई।

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कार का मॉडल ही निकला अलग

चालान में दिखाई गई गाड़ी का मॉडल कमलजीत की कार से अलग था। इतना ही नहीं, चालान में दर्ज वाहन नंबर और उनकी कार के वास्तविक नंबर में भी एक अंक का अंतर पाया गया। इसके बाद कार मालिक ने पूरे मामले की जांच की मांग उठाई है।

जयपुर में चालान का मैसेज

मंडी जिले के झोर निवासी कमलजीत के मोबाइल फोन पर उनकी कार के चालान से संबंधित संदेश आया। संदेश में राजस्थान के जयपुर में वाहन का चालान किए जाने की जानकारी दी गई थी। साथ ही यह भी बताया गया कि चालान को कोर्ट भेज दिया गया है।

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घर में खड़ी है कार

यह जानकारी मिलते ही कमलजीत हैरान हो गए, क्योंकि उनके अनुसार उनकी कार काफी समय से घर के पास ही खड़ी है। बरसात के कारण उनके घर की ओर जाने वाला रास्ता खराब होने के चलते वह करीब दो महीने से वाहन का इस्तेमाल भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही था कि जब कार हिमाचल से बाहर गई ही नहीं तो जयपुर में उसका चालान कैसे कट गया।

लोक मित्र केंद्र में निकलवाई डिटेल

चालान का संदेश मिलने के बाद कमलजीत ने मामले की सच्चाई जानने के लिए लोक मित्र केंद्र का रुख किया। वहां उन्होंने चालान की पूरी जानकारी निकलवाई। इसके बाद मामला और भी चौंकाने वाला सामने आया।

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स्कोडा बन गई इग्निस

चालान के साथ उपलब्ध तस्वीर में स्कोडा कार दिखाई दे रही थी, जबकि कमलजीत के पास मारुति सुजुकी इग्निस है। यानी चालान में दिखाई गई कार और कमलजीत के वाहन का मॉडल ही अलग था।

नंबरों में भी अंतर

इसके बाद वाहन नंबर की भी जांच की गई। चालान में HP-82-8227 नंबर दर्ज था, जबकि कमलजीत की कार का वास्तविक नंबर HP-82-8287 बताया गया है। दोनों नंबरों में केवल एक अंक का अंतर है।

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दूसरे वाहन पर पहुंचा चालान?

मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वाहन नंबर दर्ज करते समय किसी तरह की गलती हुई या तकनीकी व्यवस्था में किसी त्रुटि के कारण दूसरे वाहन का चालान कमलजीत की कार के नंबर से जुड़ गया।

मामले की हो गहन जांच

कमलजीत का मानना है कि यह मानवीय भूल या सिस्टम से जुड़ी गलती हो सकती है। उनका कहना है कि यदि चालान की तस्वीर में अलग मॉडल की कार है और वाहन नंबर भी उनके वास्तविक नंबर से मेल नहीं खाता, तो मामले की जांच होना जरूरी है।

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करीब दो महीने से घर के पास खड़ी है कार

कमलजीत के अनुसार बरसात के कारण उनके घर तक पहुंचने वाला रास्ता खराब हो गया है। इसी वजह से उनकी कार पिछले करीब दो महीने से घर के आसपास ही खड़ी है। उनका कहना है कि इस अवधि में वाहन हिमाचल प्रदेश से बाहर गया ही नहीं।

 

दो महीने से घर के पास खड़ी है कार

जयपुर में कैसा कटा चालान

ऐसे में राजस्थान के जयपुर में वाहन का चालान कटने की सूचना उनके लिए किसी पहेली से कम नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वाहन मंडी में उनके घर के पास खड़ा था, तो उसे जयपुर में कैसे चालान किया जा सकता है।

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आर्थिक और मानसिक परेशानी की बात कही

कमलजीत ने बताया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखते हैं और काफी मुश्किलों के बाद उन्होंने यह कार खरीदी है। ऐसे में बिना किसी गलती के चालान कटने और उसके कोर्ट तक पहुंचने की जानकारी मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वाहन मालिक को दिक्कत

उनका कहना है कि किसी दूसरे राज्य में जाकर चालान से जुड़े मामले को सुलझाना आम वाहन मालिक के लिए आसान नहीं है। यदि तकनीकी या मानवीय गलती के कारण गलत चालान किसी वाहन मालिक के नाम पर दर्ज हो जाए तो उसे अनावश्यक कानूनी और आर्थिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।

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मॉडल और फोटो का भी हो मिलान

कमलजीत ने मांग की है कि मामले की जांच करते समय चालान में दर्ज वाहन नंबर के साथ-साथ वाहन के मॉडल और फोटो का भी मिलान किया जाए। उनका कहना है कि यदि चालान में दिखाई गई गाड़ी अलग है और उसका नंबर भी उनके वाहन से मेल नहीं खाता, तो चालान की वास्तविकता स्पष्ट की जानी चाहिए।

 

राजस्थान में कटा कार का चालान

 

उन्होंने संबंधित पुलिस और परिवहन अधिकारियों से मामले की जांच कर गलत पाए जाने पर चालान को निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि चालान जारी करने से पहले वाहन के नंबर के साथ उसकी फोटो और मॉडल की जानकारी का भी सत्यापन किया जाना चाहिए।

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प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद

कमलजीत ने केंद्र सरकार, पुलिस प्रशासन और संबंधित परिवहन विभाग से पूरे मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा कि जयपुर में जिस वाहन का चालान किया गया, वह वास्तव में कौन सा वाहन था और उसका कमलजीत की कार के नंबर से संबंध कैसे जुड़ा।

उठ रहे कई सवाल

फिलहाल मामला वाहन नंबर, चालान की तस्वीर और कार के मॉडल के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। कमलजीत का कहना है कि तकनीकी व्यवस्था लोगों की सुविधा के लिए है। मगर उसमें होने वाली छोटी सी गलती का असर सीधे वाहन मालिक पर पड़ सकता है। इसलिए चालान जारी करते समय वाहन नंबर के साथ फोटो, मॉडल और अन्य जरूरी विवरणों का मिलान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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