केलांग। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में विधायक और वन विभाग के अधिकारी के बीच तालमेल को लेकर मामला अब विधानसभा सचिवालय तक पहुंच गया है। विधायक अनुराधा राणा ने स्थानीय DFO के रवैये को लेकर विशेषाधिकार हनन की शिकायत दर्ज कराई है।

विधायक ने की कार्रवाई की मांग

विधायक का आरोप है कि उनके द्वारा उठाए गए मामलों पर अधिकारी की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और संपर्क करने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष से मामले में कार्रवाई की मांग की है।

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वन विभाग के सचिव से जवाब मांगा

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भी शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शिकायत के आधार पर वन विभाग के सचिव से जवाब मांगा गया है। अब वन सचिव संबंधित DFO  से पूरे मामले में जवाब लेकर विधानसभा सचिवालय को भेजेंगे। इसके बाद शिकायत में लगाए गए आरोपों और अधिकारी के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

विधायक ने काम न होने का लगाया आरोप

अनुराधा राणा का कहना है कि उन्होंने अपने क्षेत्र से जुड़े कुछ मामलों को लेकर DFO से कार्रवाई की अपेक्षा की थी। उनका आरोप है कि इन मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा अधिकारी से संपर्क करने पर भी उन्हें उचित प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसी आधार पर उन्होंने इसे विधायक के विशेषाधिकारों से जुड़ा मामला मानते हुए विधानसभा सचिवालय में शिकायत दी है।

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अब इस मामले में वन विभाग के स्तर से आने वाले जवाब पर सबकी नजर रहेगी। विधानसभा सचिवालय यह देखेगा कि विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और अधिकारी की ओर से मामले में क्या कार्रवाई की गई।

पहले पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ भी उठाया था मामला

अनुराधा राणा इससे पहले एक पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ भी विशेषाधिकार हनन की शिकायत कर चुकी हैं। विधानसभा अध्यक्ष के मुताबिक वह मामला अब निपट चुका है। DFO के खिलाफ मौजूदा शिकायत विशेषाधिकार से जुड़ा उनका दूसरा मामला है।

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विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि विशेषाधिकार से जुड़े कुछ मामले पहले ही निपटाए जा चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों या पक्षों से जवाब मांगा गया है।

अफसरों के खिलाफ पहले भी उठते रहे हैं

सुक्खू सरकार के कार्यकाल में विधायकों की ओर से अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों के खिलाफ विशेषाधिकार से जुड़े कई मामले विधानसभा में उठाए गए हैं। इनमें अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों के साथ-साथ सदन में कथित तौर पर गलत जानकारी देने और असंसदीय टिप्पणी जैसे मामले भी शामिल रहे हैं।

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विशेषाधिकार का नोटिस दिया

2025 में विधायक सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री की ओर से सदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए विशेषाधिकार का नोटिस दिया था। वहीं दिसंबर 2025 में भाजपा विधायकों विपिन सिंह परमार, राकेश जम्वाल और त्रिलोक जम्वाल ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के खिलाफ विशेषाधिकार का मामला उठाया था।

 

जनवरी 2026 में आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा ने मंडी के तत्कालीन उपायुक्त अपूर्व देवगन के खिलाफ प्रोटोकॉल से जुड़े मामले को लेकर विशेषाधिकार का मुद्दा उठाया। इसी तरह दून के विधायक राम कुमार चौधरी ने तत्कालीन एसपी बद्दी इल्मा अफरोज के खिलाफ भी विशेषाधिकार का मामला उठाया था।

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सदन में दिए आश्वासनों पर भी नजर रखेगी कमेटी

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सदन में सरकार की ओर से दिए जाने वाले आश्वासनों की निगरानी के लिए एश्योरेंस कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी यह देखेगी कि मंत्रियों की ओर से सदन में किए गए ऐलान और आश्वासनों को संबंधित विभागों ने लागू किया या नहीं।

मानसून सत्र में 10 बैठकें

उन्होंने बताया कि हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 10 बैठकें होंगी। 27 अगस्त को गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस रखा गया है। सत्र के पहले दिन पूर्व विधायक स्वर्गीय विजेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया के प्रति शोकोद्गार किया जाएगा।

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