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September 23, 2026

हिमाचल: टनल बनने से घरों में दरारें, गुस्साए मंत्री अनिरुद्ध सिंह बोले- घटिया काम कर रहा NHAI

मंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

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Anirudh Singh NHAI Tunnel Construction

शिमला। राजधानी शिमला के संजौली-शांति विहार क्षेत्र में फोरलेन टनल निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई रिहायशी भवनों में दीवारों और फर्श पर दरारें आने के बाद प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का दावा है कि टनल निर्माण के बाद नुकसान बढ़ा है। जिला प्रशासन ने फिलहाल निर्माण से जुड़ी अनुमति पर रोक लगाई है और मामले की तकनीकी जांच की तैयारी शुरू कर दी है।

मंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

मामला सामने आने के बाद पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह से प्रभावित लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। मंत्री ने संजौली, भट्टाकुफर और ढली क्षेत्र में सामने आए नुकसान को गंभीर बताया और टनल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

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मंत्री के मुताबिक करीब 13 से 14 भवनों में बड़ी दरारें सामने आने की जानकारी मिली है। उन्होंने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर मामला कानूनी स्तर तक ले जाया जा सकता है।

NHAI ने आरोपों से किया इनकार

दूसरी ओर, NHAI ने टनल निर्माण को मकानों में आई दरारों का कारण मानने से इनकार किया है। प्राधिकरण के अनुसार निर्माण के दौरान निर्धारित इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों का पालन किया जा रहा है।

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NHAI ने यह भी कहा है कि टनल से जुड़ी ब्लास्टिंग गतिविधियां नवंबर 2025 में रोक दी गई थीं और उसके बाद ब्लास्टिंग नहीं की गई। प्रभावित स्थानों पर ग्राउटिंग, क्रैक सीलिंग और अन्य मरम्मत संबंधी उपाय भी किए गए हैं।

प्रशासन ने काम रोका

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिमला जिला प्रशासन ने टनल क्षेत्र का निरीक्षण किया और निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई की। अब प्रभावित भवनों की स्थिति और दरारों के वास्तविक कारण का वैज्ञानिक आकलन कराने की तैयारी है। रिपोर्टों के मुताबिक IIT रुड़की की विशेषज्ञ टीम से करीब 10 प्रभावित भवनों का तकनीकी अध्ययन कराने की योजना है। साथ ही टनल के आसपास 100 मीटर के दायरे में आने वाले ढांचों का भी आकलन किए जाने की बात सामने आई है।

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शांति विहार वार्ड के लोगों ने मंत्री के सामने भवनों की सुरक्षा और नुकसान के आकलन का मुद्दा उठाया। स्थानीय प्रतिनिधियों के अनुसार लोगों की मांग है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण कार्य आगे न बढ़ाया जाए। प्रभावित परिवारों ने नुकसान का उचित मूल्यांकन कराने और जरूरत पड़ने पर अधिग्रहण व मुआवजे की व्यवस्था करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि मकानों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट तकनीकी रिपोर्ट सामने आना जरूरी है।

हाई पावर कमेटी बनाने की तैयारी

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। इसके बाद पर्यावरण विशेषज्ञों, भूवैज्ञानिकों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल करते हुए हाई पावर कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का सुझाव भी दिया है। प्रभावित लोग अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात कर मामले की जानकारी देने की तैयारी में हैं।

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