#अव्यवस्था
September 23, 2026
हिमाचल में बनी 64 दवाएं फेल, बच्चों के सिरप से बुखार तक की मेडिसन जांच में नहीं उतरी खरी
अलग-अलग तरह की खामियां सामने आईं हैं
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माण को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। अगस्त के ड्रग अलर्ट में प्रदेश में बनी 64 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। इनमें बच्चों के सिरप, बुखार और खांसी की दवाओं के साथ एंटीबायोटिक, किडनी से जुड़ी दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन की दवाएं भी शामिल हैं।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में देशभर की 220 दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरने की जानकारी दी गई है। इनमें सबसे ज्यादा 64 दवाएं हिमाचल में बनी हैं।
हिमाचल की बात करें तो सबसे ज्यादा सैंपल सोलन जिले की दवा कंपनियों के फेल हुए हैं। यहां बनी 33 दवाएं गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरीं। इसके बाद सिरमौर की 24 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं।
इसके अलावा ऊना की चार, कांगड़ा की दो और बिलासपुर की एक दवा भी जांच में फेल हुई है। इन दवाओं का निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, कुमारहट्टी, सोलन, बिलासपुर, ऊना और कांगड़ा की अलग-अलग दवा इकाइयों में हुआ था।
ड्रग अलर्ट के अनुसार देशभर में गुणवत्ता जांच में फेल हुए 220 नमूनों में से 191 की जांच राज्य की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में हुई थी, जबकि 29 नमूनों की जांच केंद्रीय प्रयोगशालाओं में की गई। इनमें एक नमूना नकली भी पाया गया है।
जांच के दौरान दवाओं में अलग-अलग तरह की खामियां सामने आईं। कुछ दवाएं तय समय और तरीके से घुल नहीं पाईं, जबकि कुछ में दवा की मात्रा या सक्रिय औषधीय तत्व निर्धारित स्तर पर नहीं मिले। कुछ सैंपल पीएच, निष्क्रमण और दवा में मौजूद कणों से जुड़े मानकों पर भी फेल हुए हैं।
फेल हुए सैंपलों में कई आम इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें कैल्शियम और विटामिन डी-3 की टैबलेट, लाइनजोलिड एंटीबायोटिक, सिफ्यूरोक्सिम, मधुमेह की दवा सिटागलिप्टिन और मेटफॉर्मिन, एस्माप्राजोल, एजिथ्रोमाइसिन और लैक्टिक एसिड बैसिलस जैसी दवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा एलर्जी के लिए इस्तेमाल होने वाला मोंटेलुकास्ट और लेवोसेटिरिजिन सिरप, बच्चों को संक्रमण और बुखार में दी जाने वाली पैरासिटामोल पेडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन, इट्राकोनाजोल कैप्सूल और प्रेगाबालिन समेत कई अन्य दवाओं के सैंपल भी फेल हुए हैं। कुछ इंजेक्शन भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें रैबेप्राजोल सोडियम और एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन शामिल हैं।
हिमाचल में इस साल दवाओं के फेल सैंपलों का आंकड़ा लगातार सामने आया है। जनवरी में 71, फरवरी में 73, मार्च में 76, अप्रैल में 31, मई में 43, जून में 46 और जुलाई में 83 दवाओं के सैंपल फेल हुए थे। अगस्त में 64 सैंपल फेल पाए गए। फेल होने वाले ज्यादातर सैंपल बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ के दवा उद्योगों से जुड़े हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों को लेकर दवा विभाग की निगरानी भी बढ़ी है।
राज्य औषधि विभाग ने गुणवत्ता जांच में फेल हुए सैंपलों से जुड़ी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। संबंधित बैच की बिक्री और सप्लाई रोकने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, गुणवत्ता जांच में फेल नमूनों से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। संबंधित बैच की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के साथ कंपनियों से जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।