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October 2, 2026
IGMC में चरमराई व्यवस्था- 10 महीने से हार्ट सर्जरी बंद, PGI में मरीजों को 1 साल का इंतजार
शिफ्टिंग के बाद बढ़ी मरीजों की मुश्किलें
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शिमला। कहते हैं कि जल्दी का काम शैतानी का होता है। हिमाचल के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां सरकार के एक बड़े फैसले के बाद अब उसका असर सीधे दिल के मरीजों पर पड़ता दिख रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC से जुड़ी एक ऐसी व्यवस्था बदली गई, जिसके बाद पिछले कई महीनों से मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दिल के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
बता दें कि प्रदेश के बड़े अस्पताल IGMC शिमला और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में करीब 10 महीने से ओपन हार्ट सर्जरी नहीं हो पा रही है। सरकार ने कार्डियोलॉजी और CTVS विभाग को IGMC से चमियाना शिफ्ट कर दिया, लेकिन विभागों को शिफ्ट करने से पहले वहां जरूरी सुविधाएं पूरी तरह तैयार नहीं थीं। सबसे बड़ी कमी ब्लड बैंक की रही।
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ओपन हार्ट सर्जरी की सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों को इलाज के लिए PGI चंडीगढ़ या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों को फिलहाल दवाइयां देकर सर्जरी के लिए इंतजार करने की सलाह दी जा रही है। इससे गंभीर मरीजों और उनके परिवारों की परेशानी बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित डॉक्टरों ने IGMC से दोनों डिपार्टमेंट शिफ्ट करते वक्त मैनेजमेंट को यह बात कही थी कि जब तक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं बन जाता, तब तक कार्डियोलॉजी और CTVS को IGMC में रहने दिया जाए। मगर सरकार नहीं मानी। इससे दिल के मरीज नौ महीने से परेशान हैं।
साधन संपन्न लोग बाहरी राज्यों के बड़े अस्पतालों में जाकर इन सर्जरी पर 5 से 10 लाख रुपए खर्च कर रहे हैं, जबकि निर्धन पृष्ठभूमि के लोगों के पास इंतजार के अलावा दूसरा चारा नहीं बचा। या फिर उन्हें PGI चंडीगढ़ जाकर सर्जरी के लिए छह महीने से भी ज्यादा लंबी डेट मिल रही है। कुछ मरीजों को दवाओं के सहारे छोड़ा जा रहा है।
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चमियाना अस्पताल में उपचाराधीन एक मरीज के बेटे आशीष खाची ने बताया कि जो सुविधा 2005 में IGMC में मिल रही थी, वह 2026 में नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके पिता का हार्ट वॉल्व चेंज होना है। मगर चमियाना में लगभग एक साल से हार्ट वॉल्व चेंज नहीं हो रहे हैं।
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उन्होंने सवाल उठाए कि जब चमियाना अस्पताल में मेजर ऑपरेशन की सुविधा नहीं थी तो जल्दबाजी में कार्डियोलॉजी और CTVS को चमियाना शिफ्ट क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल में सर्जरी नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि उनके साथ सैकड़ों मरीज सर्जरी नहीं होने से परेशान हैं।
चमियाना अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं होने के कारण वाल्व रिप्लेसमेंट, बाईपास सर्जरी, जन्मजात हृदय रोग से जुड़े जटिल ऑपरेशन, हार्ट की प्रमुख रक्त नलिकाओं की जटिल सर्जरी और कई बड़ी हार्ट सर्जरी नहीं हो पा रही हैं। यहां ब्लड बैंक के अलावा ट्रेंड नर्स और कार्डियक एनेस्थीसिया भी नहीं है।
इससे डॉक्टर दिल की मेजर सर्जरी का जोखिम नहीं ले पा रहे हैं। CTVS का काम केवल छोटे ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। इस विभाग में दिल, छाती और शरीर की प्रमुख रक्त वाहिकाओं से जुड़े जटिल ऑपरेशन होते हैं।दिल की सर्जरी पर संकट कैसे आया?
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हिमाचल सरकार ने चमियाना में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाया है। मई 2025 में सरकार ने यहां छह सुपर स्पेशलिटी डिपार्टमेंट शिफ्ट किए। सितंबर 2025 में कार्डियोलॉजी और CTVS को भी चमियाना शिफ्ट किया गया। यहीं से ओपन हार्ट सर्जरी का संकट शुरू हो गया, क्योंकि सरकार ने विभाग तो शिफ्ट कर दिया, लेकिन ब्लड बैंक और स्टाफ जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं जुटाई।
मरीजों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जिस IGMC में कार्डियक इलाज साल 2005 में शुरू हो गया था, वहां से विभाग शिफ्ट होने के कारण अब इसका इलाज नहीं मिल रहा। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब चमियाना में तैयारी नहीं थी तो जल्दबाजी में दिल के इलाज से जुड़े दोनों विभाग शिफ्ट क्यों किए गए?
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ओपन हार्ट सर्जरी सामान्य ऑपरेशन से कहीं ज्यादा जटिल होती है। इसमें हार्ट और बड़ी रक्त वाहिकाओं पर ऑपरेशन होता है। ऑपरेशन के दौरान या उसके बाद अचानक ज्यादा रक्तस्राव, खून की कमी या दूसरी जटिलता पैदा होने पर तुरंत उपयुक्त रक्त और रक्त उत्पाद की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए ताजा ब्लड जरूरी होता है।
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चमियाना में अब तक ब्लड बैंक नहीं है। हालांकि, यहां ब्लड स्टोरेज यूनिट जरूर है। स्टोरेज यूनिट में पहले से उपलब्ध रक्त रखा जा सकता है, लेकिन किसी बड़े ऑपरेशन के दौरान अचानक जरूरत पड़ने पर रक्त की उपलब्धता, ग्रुपिंग, क्रॉस-मैचिंग और दूसरी ट्रांसफ्यूजन संबंधी व्यवस्थाओं के लिए पूरी तरह तैयार ब्लड बैंक/ट्रांसफ्यूजन सपोर्ट नहीं है।