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September 28, 2026

हिमाचल: 350 छात्रों पर मंडरा रहा 'करंट' का खतरा, स्कूल परिसर के पास से गुजर रही बिजली की तारें

बिजली विभाग की लापरवाही कभी भी पड़ सकती है भारी

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Chamba School News

चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला में प्रशासन की लापरवाही 350 से भी अधिक स्कूली बच्चों पर कभी भी भारी पड़ सकती है। चुराह विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गनेड से एक बेहद खौफनाक और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां सरकारी स्कूल परिसर के नजदीक से गुजर रही बिजली की तारें किसी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल की दीवार और प्रांगण से महज चार से पांच फीट की दूरी पर 350 से अधिक बच्चों के सिर पर मौत बनकर यह हाई-वोल्टेज लाइन झूल रही है।

 

स्कूल प्रशासन के बार-बार आग्रह के बाद भी संबंधित अधिकारी इस समस्या का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति यह है कि रोजाना हंसते-खेलते और भविष्य के सपने बुनते मासूम बच्चे हर पल मौत के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

प्रार्थना सभा से लेकर खेल के मैदान तक डर का माहौल

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गनेड में पहली कक्षा से लेकर वरिष्ठ कक्षाओं तक के 350 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सुबह की प्रार्थना सभा से लेकर खेल के मैदान तक, बच्चे हर गतिविधि इसी प्रांगण में करते हैं। नन्हें-मुन्ने बच्चों को खेलते समय यह भान भी नहीं रहता कि जरा सी चूक या तारों के संपर्क में आना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। अभिभावकों और शिक्षकों के मन में हर पल यही डर सताता रहता है कि कहीं यह बिजली की तारें किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाएं।

 

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स्कूल प्रबंधन ने किया है देसी जुगाड़

विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि स्कूल प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा के लिए खुद ही देसी उपाय तलाशने पड़े। स्कूल के कार्यकारी प्रधानाचार्य लेखराज ने बताया कि खतरे को भांपते हुए उन्होंने अपने स्तर पर बिजली की तारों पर प्लास्टिक के पाइप चढ़ा दिए हैं ताकि बच्चे सीधे संपर्क में न आएं।

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हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या प्लास्टिक का पाइप लगाना 11 केवी या हाई-वोल्टेज तारों का स्थायी समाधान है? तेज हवा या बारिश में यदि यह तार टूटकर परिसर में गिर जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? स्कूल प्रशासन की स्पष्ट मांग है कि बिजली विभाग तुरंत नए पोल लगाकर इस विद्युत लाइन को स्कूल परिसर से उचित दूरी पर स्थानांतरित करे।

डेढ़ साल से फाइलों में दबा मामला

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से लगातार बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। लिखित शिकायतों और मौखिक गुहार के बावजूद विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। 

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स्थानीय अभिभावकों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि क्या बिजली विभाग और जिला प्रशासन किसी मासूम की बलि चढ़ने का इंतजार कर रहे हैं? यदि समय रहते इन तारों को नहीं हटाया गया और कोई अनहोनी हुई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और लाचार प्रशासन की होगी।

अधिकारियों का वही घिसा-पिटा आश्वासन

मामले को लेकर जब बिजली विभाग के एसडीओ तीसा अमीचंद से बात की गई, तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा, "मामला ध्यान में लाया गया है और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा किसी भी विभागीय प्रक्रिया से बड़ी है और हादसा होने से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। हालांकि, यह आश्वासन क्षेत्रवासियों और स्कूल प्रशासन के गले नहीं उतर रहा, क्योंकि डेढ़ साल से अधिकारी केवल आश्वासन का पुलिंदा ही बांध रहे हैं और धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

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