कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों में गिने जाने वाले डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा की व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं।अस्पताल में मरीजों को स्ट्रेचर उपलब्ध न होने की शिकायत का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।
महिला एंबुलेंस चालक की वीडियो वायरल
इस मुद्दे को 108 एंबुलेंस की महिला चालक अंजू देवी ने अपने मोबाइल कैमरे पर रिकॉर्ड किया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला चर्चा का विषय बन गया। एंबुलेंस महिला चालक की ये वीडियो इंटरनेट पर काफी वायरल हो रही है।
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मरीज को नहीं मिला स्ट्रेचर
वायरल वीडियो में अंजू देवी अस्पताल परिसर में खड़ी अपनी एंबुलेंस के पास दिखाई देती हैं। वह बताती हैं कि वह एक मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचीं, लेकिन मरीज को इमरजेंसी वार्ड तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं कराया गया।
अस्पताल के बाहर तड़पता रहा मरीज
उन्होंने कहा कि मरीज दर्द में है, हम कब से खड़े हैं, लेकिन स्ट्रेचर देने वाला कोई नहीं। यहां मरीज तड़पते रहते हैं, कोई सुनने वाला नहीं होता। आखिरकार काफी देर बाद मरीज को व्हीलचेयर पर अस्पताल के अंदर ले जाया गया।
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देरी के कारण जान को खतरा
अंजू देवी ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में यदि मरीज की हालत गंभीर हो तो देरी के कारण उसकी जान तक खतरे में पड़ सकती है। वीडियो वायरल होते ही लोग भड़क उठे। हजारों यूजर्स ने वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को शर्मनाक, दुर्दशा की मिसाल और लापरवाही की पराकाष्ठा बताया।
प्रबंधन की चुप्पी, मरीजों की परेशानी जारी
मामले पर अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह चुप्पी लोगों के आक्रोश और अविश्वास को और बढ़ा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, बेड और पैरामेडिकल स्टाफ किसी भी अस्पताल की सबसे बुनियादी आवश्यकताएं हैं। ऐसे में टांडा जैसे राज्य के मुख्य स्वास्थ्य संस्थान में इस तरह की शिकायत सामने आना व्यवस्था में गहरी खामियों को दर्शाता है।
