कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत और बच्चों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अभी कुछ दिन पहले ही रामपुर बुशहर के दौरे पर गए थे, जहां एक छात्रा की स्कूल भवन की मांग पर दो करोड़ रुपये देने का ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री की इस घोषणा ने जहां एक छात्रा की आवाज को चर्चा में ला दिया, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के उन स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं, जहां बच्चे आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र से सामने आया है। यहां 49 विद्यार्थियों का भविष्य महज एक कमरे में सिमटकर रह गया है। स्कूल भवन को भूस्खलन ने दो साल पहले तबाह कर दिया था, लेकिन आज तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एक छात्रा की मांग पर करोड़ों रुपये का ऐलान हो सकता है, तो इन 49 बच्चों को नया स्कूल भवन कब मिलेगा?
एक कमरे में पढ़ रहे 49 बच्चे
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने की बातें लगातार होती रही हैं। लेकिन कुल्लू जिले के दुर्गम क्षेत्र में स्थित बालू प्राथमिक स्कूल की स्थिति इन दावों के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करती है। आनी विकास खंड की करशईगाड़ पंचायत में स्थित इस स्कूल में दो पंचायतों के 49 विद्यार्थी पढ़ते हैं। पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। दो साल से चली आ रही यह व्यवस्था अब विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
यह भी पढ़ें : युवा बेरोजगारों को नहीं...हिमाचल में सुक्खू सरकार कर रही बुजुर्गों की भर्ती, 70 हजार तक देगी वेतन
भूस्खलन ने छीना स्कूल भवन, दो साल बाद भी इंतजार
बालू प्राथमिक स्कूल का भवन करीब दो साल पहले भूस्खलन की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इस हादसे में स्कूल का शौचालय, स्टेशनरी और अन्य जरूरी सामान भी मलबे में दबकर नष्ट हो गया। भवन के नुकसान के बाद बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई। उम्मीद थी कि जल्द ही नए भवन का निर्माण होगा और विद्यार्थियों को फिर से बेहतर माहौल में पढ़ने का अवसर मिलेगा। मगर दो साल गुजर जाने के बाद भी नया भवन नहीं बन पाया है। बच्चों की पढ़ाई अब भी उसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे चल रही है।
एक कमरे में पांच कक्षाएं, पढ़ाई कराना बड़ी चुनौती
स्कूल की मौजूदा स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाएं एक ही कमरे में लगती हैं। जिस कमरे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, वह मुख्य स्कूल भवन से अलग बना हुआ था और भूस्खलन की चपेट में आने से बच गया था। अब इसी एक कमरे में पांच कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाने के साथ-साथ स्टाफ रूम और कार्यालय का काम भी चलाया जा रहा है। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाना शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण है। वहीं, विद्यार्थियों को भी अपनी कक्षा के अनुरूप शांत वातावरण और पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में गजब का टोपीबाज! सेना की वर्दी पहन घूम रहा था, खुद को बताया अफसर, हुआ अरेस्ट
बच्चों और शिक्षकों के लिए एक ही शौचालय
समस्या केवल कमरों की कमी तक सीमित नहीं है। स्कूल में शौचालय की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। उपलब्ध एकमात्र शौचालय का इस्तेमाल बच्चों और अध्यापकों, दोनों को करना पड़ रहा है। भवन क्षतिग्रस्त होने के बाद स्कूल का जरूरी सामान भी नष्ट हो गया था। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच विद्यार्थियों को पढ़ाना और स्कूल की रोजमर्रा की गतिविधियां संचालित करना प्रबंधन के लिए मुश्किल बना हुआ है। दूरदराज क्षेत्र के इस स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों के शैक्षणिक वातावरण पर भी असर डाल रही है।
एस्टीमेट तैयार, लेकिन निर्माण के लिए बजट का इंतजार
स्कूल भवन के निर्माण को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई है। कार्यकारी खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ), आनी उत्तम ने बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए एस्टीमेट तैयार कर संबंधित स्तर पर भेज दिया गया है। हालांकि, भवन निर्माण की मंजूरी और बजट उपलब्ध होने के बाद ही काम शुरू हो सकेगा। फिलहाल विद्यार्थियों को राहत देने वाली सबसे अहम जरूरत नए भवन का निर्माण है, लेकिन इसकी समयसीमा स्पष्ट नहीं है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : 17 वर्षीय लड़की संग किया मुंह काला, फिर वीडियो वायरल करने की दी ध*मकी- FIR दर्ज
एसएमसी ने भी उठाई आवाज, अब तक नहीं मिली धनराशि
स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) ने भी इस समस्या को लेकर संबंधित विभाग के समक्ष मामला उठाया है। समिति के अध्यक्ष चमन लाल के अनुसार, स्कूल भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित कर भेजा गया है। इसके बावजूद अभी तक निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। एसएमसी ने मांग की है कि विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए सरकार और शिक्षा विभाग जल्द बजट उपलब्ध करवाएं, ताकि नए भवन का निर्माण शुरू हो सके और बच्चों को एक कमरे में पढ़ने की मजबूरी से छुटकारा मिले।
अभिभावकों की चिंता, बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
अभिभावक विनय कुमार का कहना है कि एक ही कमरे में पांच कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने की व्यवस्था से बच्चों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। उनका मानना है कि पर्याप्त कक्षाएं नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों की मांग है कि सरकार इस मामले को प्राथमिकता दे और स्कूल के लिए जल्द नया भवन बनवाए, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। आखिरकार, दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों को भी सुरक्षित भवन और बुनियादी सुविधाएं मिलना जरूरी है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में दिवाली से पहले महंगी हुई देसी घी से बनी मिठाइयां, जानें कितने बढ़े रेट
विधायक ने सरकार पर लगाया क्षेत्र की अनदेखी का आरोप
आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार ने इस मामले को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आनी विधानसभा क्षेत्र की योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा, जिसके कारण विकास कार्य लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा कि बालू प्राथमिक स्कूल की समस्या का समाधान निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, स्कूल भवन के निर्माण के लिए बजट कब स्वीकृत होगा और काम कब शुरू होगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : बिना शटडाउन चला था काम, करंट की चपेट में आकर एक युवक की मौ**त- ठेकेदार पर FIR
रामपुर में दो करोड़ का ऐलान, बालू स्कूल को कब मिलेगी राहत?
मुख्यमंत्री के रामपुर बुशहर दौरे के दौरान एक छात्रा की मांग पर स्कूल भवन के लिए दो करोड़ रुपये देने की घोषणा ने शिक्षा सुविधाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल यह नहीं कि किसी स्कूल को भवन के लिए धनराशि क्यों दी गई, बल्कि यह है कि प्रदेश के दूसरे स्कूलों में भी ऐसी बुनियादी जरूरतों को कितनी प्राथमिकता मिल रही है। बालू प्राथमिक स्कूल में 49 बच्चे दो साल से एक कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं। भवन निर्माण का एस्टीमेट भेजा जा चुका है और एसएमसी भी लगातार मांग उठा रही है, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ है।
