शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन का एक अनोखा मामला सामने आया है। सुक्खू सरकार ने वन विभाग के करीब 300 वन रक्षकों को पदोन्नत कर डिप्टी रेंजर (उप वन रक्षक) तो बना दिया] लेकिन उन्हें नई तैनाती देना मानो भूल गई। परिणामस्वरूप पदोन्नति मिलने के करीब 9 महीने बाद भी ये कर्मचारी अपनी नई जिम्मेदारियां संभालने का इंतजार कर रहे हैं।
स्थिति यह है कि कागजों में डिप्टी रेंजर बन चुके ये कर्मचारी आज भी फील्ड में वन रक्षक के तौर पर ही काम कर रहे हैं। लंबे समय से तैनाती आदेश जारी न होने के कारण कर्मचारियों में निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
9 महीने से पोस्टिंग का इंतजार
जानकारी के अनुसार वन विभाग ने पिछले वर्ष बड़ी संख्या में वन रक्षकों को पदोन्नत कर डिप्टी रेंजर बनाया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि पदोन्नति के साथ ही उन्हें नई जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र भी मिल जाएगा, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद उनकी तैनाती नहीं हो पाई। अब हालात ऐसे हैं कि पदोन्नत कर्मचारी अपने नए पद का लाभ और अधिकार प्राप्त किए बिना पुराने पद पर ही कार्य करने को मजबूर हैं।
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मनोबल पर पड़ रहा असर
विभागीय कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब किसी कर्मचारी को पदोन्नति तो मिल जाए लेकिन उसे उस पद के अनुरूप जिम्मेदारी और कार्यस्थल न मिले, तो उसका मनोबल प्रभावित होना स्वाभाविक है। वन विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में कर्मचारियों का उत्साह और कार्यक्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति रहने से विभागीय कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।
पहले से कर्मचारियों की कमी झेल रहा विभाग
वन विभाग पहले ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। विभाग में वन रक्षकों के लगभग 850 पद खाली बताए जा रहे हैं। इन रिक्त पदों के कारण कई वन क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और संरक्षण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाली पदों को समय पर नहीं भरा गया और पदोन्नत कर्मचारियों को उचित तैनाती नहीं मिली, तो वन संरक्षण और वन अपराधों पर नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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वन मित्र व्यवस्था को नहीं मानते स्थायी समाधान
सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में वन मित्रों की तैनाती की गई है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वन मित्र नियमित और प्रशिक्षित वन रक्षकों का विकल्प नहीं हो सकते।
वन अपराधों की रोकथाम, जंगलों की सुरक्षा, वन संपदा की निगरानी और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों के लिए अनुभवी एवं नियमित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में स्थायी भर्ती और पदस्थापना को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
कर्मचारी संगठनों ने उठाई मांग
वन विभाग से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि पदोन्नत किए गए सभी 300 डिप्टी रेंजरों को तत्काल प्रभाव से तैनाती दी जाए, ताकि वे अपने नए पद की जिम्मेदारियां संभाल सकें। साथ ही विभाग में रिक्त पड़े लगभग 850 वन रक्षक पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने की मांग उठाई गई है।
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समाप्त पदों को बहाल करने की भी मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वन विभाग में पूर्व में समाप्त किए गए कई पदों को दोबारा बहाल किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि बढ़ती वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों को देखते हुए विभाग में पर्याप्त मानव संसाधन होना बेहद जरूरी है।
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एसोसिएशन ने सरकार से की हस्तक्षेप की अपील
हिमाचल प्रदेश वन रक्षक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि लंबे समय से लंबित तैनाती प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और विभागीय कार्यों में भी गति आएगी। वन विभाग की कार्यप्रणाली, जंगलों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान जरूरी माना जा रहा है।
