शिमला। हिमाचल की होनहार बेटियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि लग्न, परिश्रम और आत्मविश्वास से किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। जिसका ताजा उदाहरण हिमाचल की राजधानी शिमला के संजौली क्षेत्र की बेटी दामिनी सिंह बरार है। दामिनी सिंह ने भारत की प्रतिष्ठित पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं में देश भर में पहला स्थान हासिल कर ना सिर्फ आने गांव का बल्कि पूरे प्रदेश का नाम देश भर में रोशन कर दिया है।
ऑल इंडिया रैंक एक हासिल किया
दामिनी ने मनोविज्ञान विषय में आईआईटी कानपुर की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक एक हासिल किया है। इतना ही नहीं दामिनी ने आईआईटी दिल्ली की लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में भी टॉप किया है। जिसके चलते अब वह आईआईटी दिल्ली से डॉक्टरेट की पढ़ाई करेंगी।
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यहां भी हुआ है दामिनी का चयन
दामिनी की उपलब्धि यहीं पर खत्म नहीं होती है। दामिनी का चयन देश के अग्रणी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान NIMHANS बेंगलुरु में भी हुआ है, जहां उन्हें साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया गया है। दामिनी ने UGC-NET दिसंबर 2024 परीक्षा को अपने पहले ही प्रयास में पास कर लिया था। बड़ी बात यह है कि दामिनी ने अब तक जितनी भी शिक्षा प्राप्त की है, वह बिना किसी कोचिंग के की है। बिना कोचिंग और आत्म अध्ययन के आधार पर ही उसने अब तक सभी परीक्षाओं में टॉप किया है। दामिनी की यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों की काबिलियत और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण है।
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12वीं कक्षा से टॉप कर रही दामिनी
दामिनी की अकादमिक पृष्ठभूमि भी उतनी ही प्रभावशाली रही है। दामिनी शुरू से ही पढ़ने में काफी होशियार थी। 12वीं कक्षा में दामिनी ने पूरे शिमला क्षेत्र में टॉप किया था। दामिनी ने लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी ऑनर्स में स्नातक करने के बाद उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ मुंबई से एप्लाइड साइकोलॉजी में मास्टर्स किया है, जो भारत के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में से एक है।
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साधारण परिवार की बेटी ने हासिल किया बड़ा मुकाम
दामिनी के पिता राजनीश बरार शिमला नगर निगम में स्वच्छता निरीक्षक हैं, जबकि उनकी मां मीरा बरार एक गृहिणी हैं। एक साधारण परिवार से आने वाली दामिनी ने यह दिखा दिया कि प्रदेश की बेटियां अगर ठान लें, तो किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकती हैं। दामिनी ने अब तक जितनी भी उपलब्धियां हासिल की हैं, वह बिना किसी कोचिंग के पाई हैं। दामिनी ने कभी कोचिंग नहीं ली। बल्कि स्वयं अध्ययन कर यह मुकाम हासिल किया। दामिनी की उपलब्धि उन सभी बेटियों के लिए उदाहरण है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।
