शिमला। कहते हैं कि समय हर जख्म को भर देता है, लेकिन अपनों को खोने का दुख जीवनभर व्यक्ति के साथ चलता है। आज हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के समरहिल शिव मंदिर में हुए हादसे को पूरा एक साल हो गया है। लोगों के दिल में अभी भी इस हादसे के जख्म हरे हैं। वहीं, इस साल 31 जुलाई की आपदा ने लोगों को और नए घाव दे दिए हैं।

क्या हुआ था समरहिल शिव मंदिर में?

पिछले साल आजादी से एक दिन पहले 14 अगस्त की सुबह समरहिल शिव मंदिर में आस्था रखने वालों के लिए काली सुबह बनकर आई। समरहिल शिव बावड़ी मंदिर में लोग सावन के आखिरी सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा-अराधना में जुटे हुए थे। इसी बीच अचानक प्रलय के रूप में इतना पानी आया कि पूरा इलाका मलबे में दब गया। इस आपदा में 20 लोग मलबे में दब गए। यह भी पढ़ें: हिमाचल में अभी 6 दिन बिगड़ेगा मौसम: फ्लैश फ्लड की चेतावनी, येलो अलर्ट जारी

10 दिन बाद पूरा हुआ था सर्च ऑपरेशन

इस आपदा में मंदिर के पुजारी समेत गणित, वकालत, खेल और कारोबार से जुड़े लोग, बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिला भेंट चढ़ गए थे। आपदा के दस दिन बाद लापता लोगों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन पूरा किया गया। लोगों का कहना था  कि काश यह सर्च ऑपरेशन रेस्क्यू ऑपरेशन होता- तो कितना सुखद होता।

कई लोगों को मिली थी दर्दनाक मौत

  • सर्च ऑपरेशन में एक नन्ही बच्ची का शव उसके दादा के शव के साथ मिला था।
  • शिव मंदिर के पुजारी सुमन किशोर भी इस आपदा का हुए शिकार।
  • HPU के गणित के प्रोफेसर PL शर्मा, उनकी पत्नी चित्रलेखा और बेटा ईश इस हादसे का शिकार हुए थे। सबसे पहले चित्रलेखा का शव मिला था। फिर प्रोफेसर PL शर्मा और फिर मलबे से ईश का शव मिला था। एक ही घर से अलग-अलग दिन तीन अर्थियां निकली थी।
  • HPU की गणित की प्रोफेसर मानसी और उनके वकील पति हरीश वर्मा भी काल का ग्रास बन गए। सबसे दुखद बात यह है कि मानसी गर्भवती थी।
  • कारोबारी परिवार के पवन शर्मा भी अपनी तीन पीढ़ियों के 5 सदस्यों समेत काल का ग्रास बन गए।
  • एक मामा-भांजा हुए हादसे का शिकार।
  • सर्च ऑपरेशन के आखिरी दिन नीरज ठाकुर, पवन शर्मा और उनकी नन्ही पोती के शव मिले थे।
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क्यों आई थी आपदा?

उल्लेखनीय है कि शिव बावड़ी मंदिर में हुई तबाही का कारण बादल फटना नहीं था। वैज्ञानिकों ने इसका कारण समरहिल में पहाड़ी के नीचे जमे पानी को बताया है। पहाड़ी के नीचे इकट्ठा यह वही पानी था जो शिव बावड़ी तक आता था। घटना के दिन जोरदार बारिश से पानी का दबाव बढ़ने से भूस्खलन हुआ-स जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई।

मानसून ने हिमाचल को दिए गहरे जख्म

आपको बता दें कि मानसून सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में ऐसी आपदा आती है कि वो पूरे हिमाचल को झकझोर कर रख देती है। हर साल आने वाली आपदा लोगों को कई सबक दे जाती है। पिछले साल मानसून सीजन में कुल 509 लोग मौत का शिकार हुए थे। यह भी पढ़ें: हिमाचल के बैंक में हुआ करोड़ों का घोटाला, लोगों के FD वाले पैसे खा गया असिस्टेंट मैनेजर वहीं, इस साल भी अब तक करीब 200 लोग काल का ग्रास बन चुके हैं। बीती 31 जुलाई को आई आपदा में समेज समेत राजबन और चौहार घाटी में हुए हादसों ने 56 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। जबकि, कुछ लोग अभी भी लापता हैं। त्रासदी के कारण समेज गांव का पूरा नामोनिशान ही मिट गया है। बारिश के कारण बहुत सारे लोगों के मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं। कुछ लोगों की दुकानों, लेबर शेड, गाड़ियां और गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बिजली के ट्रांसफार्मर काम करना बंद कर गए हैं और पानी की पाइपें भी टूट गई हैं।

कैसे किया जा सकता है बचाव?

  • लैंडस्लाइड वाले इलाके चिन्हित होना जरूरी हैं।
  • लैंडस्लाइड वाली जगहों पर बस्तियां नहीं होनी चाहिए।
  • नदी किनारे मकान बनाना प्रतिबंधित हो।
  • आपदा क्षेत्रों में बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरण होने चाहिए।

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