सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों बरसात का मौसम चल रहा है। एक तरफ जहां भारी बारिश कहर बरपा रही है। वहीं, दूसरी तरफ सांप व बिच्छू के काटने का खतरा भी बढ़ गया है। इस सीजन में अब तक कई लोगों की सांप के काटने से मौत हो गई है। ताजा मामला जिला सिरमौर से सामने आया है- जहां पांवटा साहिब उपमंडल के बातामंडी में एक मजदूर की सांप के डसने के कारण दर्दनाक मौत हो गई है।
फैक्ट्री परिसर में सांप ने मजदूर को डसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला जिला सिरमौर के मोगीनंद स्थित वुड स्टॉक लैमिनेट्स लिमिटेड से सामने आया है। बताया जा रहा है कि मजदूर यहां पर काम करता था। यह हादसा शनिवार दोपहर करीब 1:45 बजे हुआ। मजदूर फैक्ट्री परिसर में काम कर रहा था। इसी दौरान उसे जहरीले सांप ने डस लिया।
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पहले नारायणगढ़ और फिर अंबाला ले जाया गया
सांप के काटने के कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। आसपास मौजूद लोगों और सहकर्मियों ने उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। सांप के काटने के बाद मजदूर को सबसे पहले हरियाणा के नारायणगढ़ अस्पताल ले जाया गया।
करीब 10 साल से इसी फैक्ट्री में कर रहा था काम
वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे अंबाला रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन और अन्य लोग उसे अंबाला लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान मजदूर ने दम तोड़ दिया।उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार और फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
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बताया जा रहा है कि बबलू पिछले करीब 10 वर्षों से वुड स्टॉक लैमिनेट्स लिमिटेड में काम कर रहा था। वह लंबे समय से इसी फैक्ट्री में मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। अचानक हुए इस हादसे ने उसके परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।
मृतक की पहचान
मृतक की पहचान 33 वर्षीय बबलू पुत्र निवासी जिला बरेली, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।
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पत्नी और तीन बच्चों का सहारा था बबलू
मृतक बबलू मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का रहने वाला था। वह अपने पीछे पत्नी ननी देवी, दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गया है। उसकी एक बेटी 8 साल की है, जबकि दूसरी बेटी अभी महज 2 साल की है। इसके अलावा उसका एक बेटा भी है। बबलू की मौत के बाद अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।
बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
बबलू की अचानक मौत से उसके तीनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। परिवार के लिए यह हादसा किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। करीब एक दशक से परिवार का खर्च उठाने वाले बबलू की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
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समय पर बेहतर इलाज मिलने पर बच सकती थी जान?
वहीं, इस घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर बबलू को सांप के काटने के बाद समय रहते उचित उपचार मिल जाता और उसे तुरंत बड़े अस्पताल पहुंचाया जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। माना जा रहा है कि ऐसे मामलों में समय पर सही इलाज बेहद जरूरी होता है। हालांकि, इस मामले में मौत के सही कारणों और इलाज से जुड़ी पूरी स्थिति मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कंपनी प्रबंधन ने परिवार की मदद का दिया भरोसा
उधर, कंपनी प्रबंधन ने एमबीएम न्यूज नेटवर्क से बातचीत में बताया कि पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रबंधन ने कहा कि परिवार की स्थिति को देखते हुए उनकी मदद करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, मृतक की पत्नी ने बताया कि बबलू पिछले करीब 10 साल से फैक्ट्री में काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।
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मजदूरों की सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर बरसात के मौसम में फैक्ट्री और आसपास के क्षेत्रों में सांप निकलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम और सांप के काटने जैसी आपात स्थिति में तुरंत इलाज की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि गंभीर हालत में मरीज को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा सुविधा कैसे उपलब्ध करवाई जाए।
