कांगड़ा। आज शहीद दिवस के मौके पर हिमाचल प्रदेश ने अपना एक वीर जवान खो दिया। देश सेवा में जीवन समर्पित करने वाले इस सैनिक को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक छा गया है और हर आंख नम है।

सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई

बता दें कि कांगड़ा जिले के धीरा उपमंडल के अंतर्गत पंचायत देवी के रहने वाले सूबेदार रीपिम चौधरी (45) को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। रीपिम चौधरी 3 डोगरा रेजिमेंट में सूबेदार के पद पर तैनात थे और सिक्किम की बर्फीली पहाड़ियों में चीन बॉर्डर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।

 

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जीभ पर बर्फ लगने से फैला संक्रमण

जानकारी के अनुसार, सितंबर 2024 में ड्यूटी के दौरान उनकी जीभ पर बर्फ लगने से संक्रमण हो गया था, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता चला गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए कमांड अस्पताल कोलकाता में भर्ती कराया गया, जहां उनका ऑपरेशन भी किया गया।

 

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हालांकि ऑपरेशन के बाद भी उनकी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए कमांड अस्पताल चंडीगढ़ शिफ्ट किया गया, जहां पिछले करीब 10 महीनों से उनका इलाज चल रहा था। तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार रात को उन्होंने अंतिम सांस ली।

शहीद को तिरंगे में लिपटकर लाया पैतृक गांव

बीते कल रविवार को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके पैतृक गांव देवी लाया गया। जैसे ही यह खबर गांव और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, बड़ी संख्या में लोग अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। हर आंख नम थी और माहौल गमगीन हो गया था।

 

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छोटे बेटे दक्ष दी  मुखाग्नि 

उनकी पत्नी अंजना ने नम आंखों से अपने पति को अंतिम विदाई दी। इस दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘वीर जवान अमर रहें’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। अंतिम संस्कार भेडू महादेव श्मशानघाट में किया गया, जहां उनके छोटे बेटे दक्ष ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर सेना के जवानों ने फायरिंग कर उन्हें अंतिम सलामी दी।

 27 वर्षों तक की देश की सेवा

रीपिम चौधरी वर्ष 1998 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और करीब 27 वर्षों तक देश की सेवा करते रहे। अगले वर्ष जनवरी में उनका सेवानिवृत्त होना तय था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ड्यूटी के दौरान हुई बीमारी ने उन्हें हमसे हमेशा के लिए दूर कर दिया।

 

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देश सेवा में परिवार का अमूल्य योगदान

रीपिम चौधरी का परिवार भी देश सेवा की परंपरा से जुड़ा हुआ है। उनके पिता स्वर्गीय रमेश चंद भारतीय सेना की सिग्नल रेजिमेंट में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके दो बेटे हैं, बड़ा बेटा तनिष्क चौधरी, जिसका हाल ही में एनडीए में चयन हुआ है और वह पुणे में प्रशिक्षण ले रहा है, जबकि छोटा बेटा दक्ष अभी कक्षा पांच में पढ़ता है।

भतीजा मेजर के पद तैनात

इसके अलावा उनके परिवार के कई सदस्य सेना और नेवी में अपनी सेवाएं दे चुके हैं या वर्तमान में दे रहे हैं। उनके बड़े भाई अनिल कुमार सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि चचेरे भाई अनूप कुमार नेवी से रिटायर हो चुके हैं। वहीं भतीजा राहुल चौधरी भारतीय सेना में मेजर के पद पर पश्चिम बंगाल में तैनात है।

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जवान को अर्पित की श्रद्धांजलि

रीपिम चौधरी के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और सेना के अधिकारी उनके घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। सभी ने उनके देश के प्रति समर्पण और बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

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