#हादसा
March 19, 2026
हिमाचल : दलदल में बुरी तरह फंसी महिला, मसीहा बने मछुआरे- खुद की परवाह किए बिना बचाई जान
दलदल में धंस गया था महिला का आधे से ज्यादा शरीर
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से सामने आई एक घटना ने यह साबित कर दिया है कि शांत और साधारण जगह भी अंदर ही अंदर बड़े खतरे छिपाए होती है। आस्था, लापरवाही और कुदरत के अनदेखे जाल के बीच घटा यह वाकया हर किसी को सतर्क रहने का संदेश देता है।
दरअसल, लुहणू घाट पर एक साधारण सी धार्मिक भावना उस वक्त खौफनाक हादसे में बदल गई- जब मछलियों को दाना डालने पहुंची एक महिला अचानक दलदल में धंसने लगी। यह घटना न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि नदी किनारों की खामोश खतरनाक सच्चाई को भी उजागर करती है।
जानकारी के अनुसार, घटना उस समय की है जब महिला श्रद्धा के साथ जलचरों को आहार देने के लिए घाट पर पहुंची थीं। बाहर से देखने पर जमीन सामान्य और ठोस लग रही थी, लेकिन वास्तव में उसके नीचे दलदल छिपा हुआ था।

जैसे ही महिला ने आगे कदम बढ़ाया, उनके पैर जमीन में धंसने लगे। कुछ ही पलों में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि वह कमर तक दलदल में समा गईं। मौके पर मौजूद लोगों को पहले तो समझ ही नहीं आया कि आखिर हो क्या रहा है।
जब महिला की चीखें गूंजीं, तब हड़कंप मच गया। हर कोई घबराया हुआ था, क्योंकि दलदल में फंसे व्यक्ति को बचाना आसान नहीं होता—जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।

इसी दौरान वहां मौजूद स्थानीय बोट चालक विजय चंद और ओमप्रकाश ने बिना समय गंवाए हालात को संभाला। उनके साथ होमगार्ड के जवान कुलदीप और अन्य सहयोगियों ने भी तुरंत मोर्चा संभाल लिया।
इन लोगों को इस इलाके की भौगोलिक बनावट का गहरा अनुभव था। उन्होंने समझदारी दिखाते हुए सीधे महिला के पास जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर रणनीति बनाई और सावधानी से उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की।
बिलासपुर मेले में उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला दलदल में फंस गई। मौके पर मौजूद दमकल कर्मियों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और अपनी सूझबूझ व बहादुरी से महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। pic.twitter.com/3L45gu6VD4
— News 4 Himalayan (@news4himalayan) March 19, 2026
काफी मशक्कत के बाद आखिरकार महिला को दलदल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अगर कुछ मिनट और देरी हो जाती, तो हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। गर्मियों के मौसम में जब नदी का जलस्तर कम हो जाता है, तब किनारों पर दलदली क्षेत्र बन जाते हैं। इन खतरनाक जगहों पर अक्सर जानवर, खासकर गायें और अन्य मवेशी फंस जाते हैं।

ऐसे में यही मल्लाह अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें बाहर निकालते हैं। दरिया के पार रहने वाले ये लोग इलाके के हर छोटे-बड़े खतरे से वाकिफ हैं और कई बार अनकहे नायकों की तरह सामने आते हैं।
यह घटना एक बड़ा सबक भी देती है। नदी किनारों पर दिखने वाली सूखी या रेतीली जमीन हमेशा सुरक्षित नहीं होती। खासकर गर्मियों में, जब पानी कम हो जाता है, तो नीचे दलदल बनने का खतरा बढ़ जाता है।
जरूरत है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि श्रद्धा के नाम पर कोई और इस तरह की दुर्घटना का शिकार न बने।