कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में एक दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। यहां एक व्यक्ति अपनी दुधारू पशु को चराने निकला था, जिस पर एक अन्य पशु ने उनकी भैंस पर हमला कर दिया। दो पशुओं की लड़ाई के बीच व्यक्ति घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। इस हादसे में जान गंवाने वाला शख्स अपनी अंतिम इच्छा भी पूरी नहीं कर पाया। मामला कांगड़ा जिला से सामने आया है।

दो पशुओं की लड़ाई में गई व्यक्ति की जान

दरअसल ज्वालामुखी क्षेत्र की जखोटा पंचायत के गुरेहड़ गांव का विशंभर दास अपनी भैंस को लेकर चराने गया था। जब वह वापस भैंस के साथ घर लौट रहा था, तो बीच रास्ते में उसकी भैंस पर एक अन्य भैंस ने हमला कर दिया। दोनों पशुओं को अलग करने के चक्कर में विशंभर दास खुद बुरी तरह से घायल हो गया और वहीं पर बेसुध हो गया। करीब 20 मिनट तक विशंभर दास वहीं पर घायल अवस्था में तड़पते रहे।

20 मिनट जमीन पर तड़पते रहे विशंभर दास

बताया जा रहा है कि गांव के ही एक व्यक्ति ने उन्हें जमीन पर तड़पते देखा और इसकी सूचना उनके परिजनों को दी। जिसके बाद मौके पर पहुंचे परिनजों ने विसंभर दास को घायल अवस्था में निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज टांडा रेफर कर दिया गया। लेकिन टांडा में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक की पहचान 72 वर्षीय विशंभर दास पुत्र कांशी राम के रूप में हुई है। यह भी पढ़ें: मानसून सत्र: सदन में गूंजा कंगना का विवादित बयान, पक्ष विपक्ष में तीखी नोकझोंक-जानें

विशंभर ने हमीरपुर मेडिकल कॉलेज को दान की थी देह

विशंभर दास ने अपनी देह और मानव अंग हमीरपुर मेडिकल कॉलेज को दान किए थे। जिसके चलते टांडा में मौत के बाद जब प्रशासन ने उनके शव को हमीरपुर ले जाने की कार्रवाई शुरू की गई। जब मृतक की अंतिम जांच की गई तो पता चला कि उसके अधिकांश अंग खराब हो गए हैं। जिन्हें निकाला नहीं जा सकता। जिसके चलते विशंभर दास की अंतिम इच्छा भी पूरी नहीं हो सकी। यह भी पढ़ें: सिग्नल तोड़ भाग रहे थे 5 यार, ट्रैफिक पुलिस पर की गाड़ी चढ़ाने की कोशिश

विशंभर दास की मौत से अकेली पड़ गई पत्नी

बता दें कि विशंभर दास बीएसएनएल विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। जिसके चलते उनकी मौत के बाद अब उनके पीछे घर में अकेली पत्नी रह गई है। विशंभर दास काफी हंसमुख व्यक्ति थे। जिनकी मौत से पूरा गांव गमगीन हो गया और पूरे गांव में बुजुर्ग को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। यह भी पढ़ें: JBT की बैचवाइज भर्ती का परिणाम घोषित, 1122 अभ्यर्थी हुए चयनित

क्यों करनी चाहिए अपनी देह दान

बता दें कि हिमाचल में आज कई लोग अपने अंग दान करने का संकल्प लेते हैं। ताकि उनकी मौत के बाद उनकी देह किसी के काम आ सके। लोगों की मौत के बाद अगर अपनी देह दान करने फैसला लिया हो तो उससे कई लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है। वहीं मानव देह मेडिकल कॉलेजों में नए बनने वाले डॉक्टरों के लिए उपयोगी साबित होती है। ऐसे में हर शख्स को अपनी देह दान करने का संकल्प लेना चाहिए।

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