कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के क्षेत्रीय अस्पताल में बच्चे को जन्म देने के बाद एक महिला की मौत का मामला अब केवल एक चिकित्सा विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। प्रसूता रजनी शर्मा उर्फ मंजू शर्मा की मौत को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लोग अस्पताल परिसर में क्रमिक अनशन पर डटे रहे और मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाते रहे।

 

इसी बीच बढ़ते जनदबाव और विरोध-प्रदर्शनों के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में तैनात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनु देवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सरकार की इस कार्रवाई को मामले में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

मौत के बाद भड़का जनाक्रोश

21 जून को क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में प्रसव के बाद महिला की मौत हुई थी। परिजनों ने इस घटना के लिए कथित चिकित्सकीय लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामला पूरे कुल्लू जिले में चर्चा का विषय बन गया। स्थानीय युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिए।

 

ढालपुर में चक्का जाम तक किया गया और अस्पताल परिसर में लगातार विरोध जारी रहा। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लोग अस्पताल परिसर में एकत्रित हुए और क्रमिक अनशन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

सरकार की बड़ी कार्रवाई

लगातार बढ़ते दबाव के बीच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 30 जून को आदेश जारी कर डॉ. अनु देवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सरकारी आदेश के अनुसार 21 जून को किए गए ऑपरेशन के बाद मरीज की मृत्यु के मामले में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है।

 

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इसी के मद्देनजर केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत यह कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि के दौरान डॉ. अनु देवी का मुख्यालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय शिमला निर्धारित किया गया है। उन्हें सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।

अस्पताल परिसर में जारी रहा क्रमिक अनशन

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता बंटी सराजी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी अस्पताल परिसर में क्रमिक अनशन पर बैठे हुए हैं। उनका आरोप है कि महिला की मौत कथित चिकित्सकीय लापरवाही का परिणाम है और मामले में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

 

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प्रशासन ने गठित की दो जांच समितियां

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। अतिरिक्त उपायुक्त (एडीएम) ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया है कि मेडिकल जांच समिति अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी। इसके साथ ही एक स्वतंत्र जांच समिति का भी गठन किया गया है, जिसमें उपमंडलाधिकारी (एसडीएम), पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को शामिल किया गया है। यह समिति पूरे मामले की अलग से जांच करेगी।

विरोध मार्च में उमड़ा जनसैलाब

मंगलवार सुबह कुल्लू के कला केंद्र से क्षेत्रीय अस्पताल तक एक विरोध मार्च भी निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर न्याय की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर की। आंदोलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों को सजा दिलाने की मांग दोहराई।

 

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विधायकों ने भी जाना आंदोलनकारियों का हाल

बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी अस्पताल पहुंचे और अनशन पर बैठे लोगों से मुलाकात की। वहीं कुल्लू के विधायक सुंदर ठाकुर ने भी अस्पताल पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और भरोसा दिलाया कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सुंदर ठाकुर ने कहा कि उन्हें डॉक्टर के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें मिली हैं और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

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रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

फिलहाल पूरे मामले में सरकार की ओर से डॉक्टर का निलंबन पहला बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन आंदोलनकारी इसे अंतिम कार्रवाई नहीं मान रहे। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई ही तय करेगी कि न्याय मिला या नहीं। कुल्लू जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामला अब प्रशासनिक जांच से आगे बढ़कर जनभावनाओं और जनआंदोलन का विषय बन चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी।

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