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June 29, 2026

सोलन MC में सियासी ड्रामा: पूर्ण बहुमत के बावजूद भाजपा का खेल अटका; कांग्रेस पलट सकती है बाजी!

नगर निगम सोलन में शपथ के बाद कांग्रेसी और निर्दलीय पार्षद बैठक छोड़ बाहर निकले

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Solan Municipal Corporation

सोलन। हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों में सोमवार को नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण के साथ मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होना था, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सोलन नगर निगम की रही। यहां भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हो सका।

 

शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस समर्थित पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद के वॉकआउट ने पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया। सोलन में हुए इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या सुक्खू सरकार और कांग्रेस यहां आखिरी समय में बाजी पलट सकती है।

बहुमत भाजपा के पास, फिर भी नहीं हो सका चुनाव

नगर निगम सोलन में भाजपा को बहुमत मिला था और पार्टी को उम्मीद थी कि सोमवार को आसानी से अपना मेयर और डिप्टी मेयर चुन लिया जाएगा। लेकिन शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कांग्रेस समर्थित पार्षदों और एक निर्दलीय सदस्य ने सदन से बाहर निकलने का फैसला कर लिया। इसके चलते आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पाया और चुनाव प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। अब मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 2 जुलाई को होगा।

 

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दो पार्षदों पर अतिक्रमण के आरोप

सोलन की राजनीति में सबसे दिलचस्प मोड़ भाजपा के दो नवनिर्वाचित पार्षदों को लेकर सामने आया है। इन दोनों पर अतिक्रमण के आरोप लगे हैं और प्रारंभिक जांच में आरोपों को सही पाया गया है। मामला फिलहाल डिविजनल कमिश्नर के पास विचाराधीन है। यदि 2 जुलाई से पहले इन पार्षदों के खिलाफ कोई प्रतिकूल फैसला आता है तो नगर निगम में भाजपा का संख्याबल प्रभावित हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस को सत्ता के समीकरण बदलने का मौका मिल सकता है। यही कारण है कि सोलन का चुनाव अब पूरे प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गया है।

 

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सुक्खू सरकार की रणनीति पर भी नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोलन नगर निगम की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। कांग्रेस पहले ही वॉकआउट के जरिए चुनाव को टालने में सफल रही है और अब उसकी निगाहें आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। हालांकि अंतिम फैसला प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा, लेकिन सोलन में सत्ता संघर्ष ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

धर्मशाला में भी टला चुनाव, कांग्रेस पार्षदों ने छोड़ी बैठक

सोलन की तरह धर्मशाला नगर निगम में भी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं हो पाया। यहां भाजपा के पास 17 में से 11 पार्षदों का समर्थन है, जबकि कांग्रेस के पांच पार्षद निर्वाचित हुए हैं। शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस पार्षदों और एक निर्दलीय सदस्य के सदन से बाहर चले जाने के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका। अब धर्मशाला में 1 जुलाई को दोबारा चुनाव कराया जाएगा। साधारण बहुमत के आधार पर होने वाले इस चुनाव में भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

 

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मंडी में भाजपा और पालमपुर में कांग्रेस ने संभाली कमान

जहां सोलन और धर्मशाला में राजनीतिक पेच फंस गया, वहीं मंडी और पालमपुर नगर निगम में चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो गई। मंडी नगर निगम में भाजपा की वरिष्ठ नेता सुमन ठाकुर को मेयर और जितेंद्र शर्मा को डिप्टी मेयर चुना गया। लगातार पांचवीं बार पार्षद बनीं सुमन ठाकुर को सर्वसम्मति से नगर निगम की कमान सौंपी गई। वहीं पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस ने अपने बहुमत के दम पर राधा सूद को महापौर और नीलम मलिक को उप महापौर चुना। पालमपुर के 15 वार्डों में से 11 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जिसके चलते यहां चुनाव औपचारिकता बनकर रह गया।

 

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दो महिलाओं के हाथ में गई दो नगर निगमों की कमान

मंडी और पालमपुर दोनों नगर निगमों में महिला नेतृत्व को प्राथमिकता मिली। दोनों स्थानों पर मेयर पद अनारक्षित होने के बावजूद महिला नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और मजबूत होती दिखाई दी।

अब 1 और 2 जुलाई पर टिकी राजनीतिक नजरें

फिलहाल हिमाचल की नगर निगम राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र सोलन और धर्मशाला बने हुए हैं। धर्मशाला में 1 जुलाई और सोलन में 2 जुलाई को होने वाले चुनावों पर सभी की निगाहें टिकी हैं। खासकर सोलन में संभावित राजनीतिक बदलाव और कानूनी फैसले आने वाले दिनों में नगर निगम की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

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