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August 9, 2026

हिमाचल में भारी बारिश की चेतावनी: 2 दिन ऑरेंज अलर्ट पर यह जिला, 15 अगस्त तक नहीं मिलेगी राहत

फ्लैश फ्लड-भूस्खलन की दी चेतावनी, लोगों से सावधान रहने की अपील

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heavy rain alert

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। मानसून की बारिश जमकर कहर बरपा रही है। प्रदेश भर में नदियां-नाले उफान पर हैं, कई सड़कें बंद हो चुकी हैं जगह-जगह भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है और बारिश से अब तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। कुदरत के इस कड़े इम्तिहान के बीच मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने एक बार फिर भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग की मानें तो आगामी 15 अगस्त तक प्रदेशवासियों और पर्यटकों को बारिश के इस रौद्र रूप से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है।

दो दिन भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी

मौसम विभाग के अनुसार 10 और 11 अगस्त को प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जिसके चलते कांगड़ा, सिरमौर और मंडी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं बिलासपुर, सोलन, चंबा, कुल्लू और शिमला में येलो अलर्ट रहेगा। इसके बाद भी मौसम साफ होने के आसार नहीं हैं। 12 से 15 अगस्त तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में येलो अलर्ट जारी रहने की संभावना है। ऐसे में पहाड़ों पर रहने वाले लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए अगले कुछ दिन बेहद सावधानी भरे रहने वाले हैं।

 

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आसमान साफ होते ही फिर मंडराने लगा बारिश का खतरा

रविवार को राजधानी शिमला समेत प्रदेश के कई इलाकों में मौसम कुछ राहत देता नजर आया। कई स्थानों पर हल्के बादलों के बीच धूप भी खिली, लेकिन यह राहत ज्यादा देर टिकने वाली नहीं है। धर्मशाला और नाहन में हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग की ताजा चेतावनी ने साफ कर दिया है कि मानसून अभी हिमाचल से जाने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर फिर तेज हो सकता है।

प्रदेश की 118 सड़कें बंद

प्रदेश में पहले से ही बारिश ने सड़क नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 118 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इनमें मंडी की 44 और कुल्लू की 39 सड़कें शामिल हैं। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण सड़क किनारे पहाड़ियां दरकने और मलबा आने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में यदि बारिश का जोर बढ़ता है तो बंद सड़कों की संख्या और बढ़ सकती है।

 

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हिमाचल को माननूस से 835 करोड़ का नुकसान

मानसून की बारिश हिमाचल के लिए भारी आर्थिक नुकसान भी लेकर आई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक करीब 835 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। पीडब्ल्यूडी को करीब 615 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है, जबकि जलशक्ति विभाग को लगभग 199 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बारिश से 18 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि शिमला जिले के चौपाल में तीन बिजली ट्रांसफार्मर भी ठप पड़े हैं।

 

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मानसून ने अब तक 155 जिंदगियां छीन लीं

प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं। 30 जून को मानसून के दस्तक देने के बाद से अब तक 155 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 87 मौतें सड़क हादसों में, 14 भूस्खलन के कारण हुई हैं, जबकि अन्य लोगों की जान करंट लगने और पानी में बहने जैसी घटनाओं में गई है। सबसे अधिक 24 मौतें चंबा जिले में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण 63 मकान पूरी तरह और 253 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। करीब 200 मवेशियों की भी जान जा चुकी है।

 

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फ्लैश फ्लड का खतरा, नदियों-नालों से रहें दूर

मौसम विभाग ने भारी बारिश के दौरान पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई है। तेज बारिश के बाद नदी-नालों और खड्डों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के दौरान जिस नाले में सामान्य दिनों में कम पानी दिखाई देता है, वह कुछ ही मिनटों में उफान पर आ सकता है। ऐसे में नदी, नालों और खड्डों के आसपास जाना जानलेवा साबित हो सकता है।

भूस्खलन संभावित रास्तों पर सफर से बचने की सलाह

भारी बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर मलबा गिरने, भूस्खलन होने और सड़क पर फिसलन बढ़ने की आशंका रहती है। इसके साथ ही कई स्थानों पर कम दृश्यता भी वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। मौसम विभाग ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा न करें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।

 

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अगले छह दिन हिमाचल के लिए भारी

हिमाचल में मानसून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले कई दिन बेहद अहम रहने वाले हैं। 10 और 11 अगस्त को ऑरेंज अलर्ट के बाद 12 से 15 अगस्त तक येलो अलर्ट जारी रहने से साफ है कि प्रदेश को फिलहाल बारिश से राहत मिलने के आसार कम हैं। पहले से ही बारिश के कारण बंद सड़कों, क्षतिग्रस्त मकानों और प्रभावित पेयजल योजनाओं के बीच यदि बारिश ने फिर रौद्र रूप लिया तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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