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August 10, 2026
हिमाचल: दो लाख का मंगलसूत्र भी नहीं डिगा पाया दुकानदार का ईमान, मालिक को लौटा पेश की मिसाल
महिला को वापस लौटाया दो लाख का सोने का मंगलसूत्र
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नाहन। आज के दौर में जहां कीमती सामान मिलने पर कई लोग उसे अपना बनाने की कोशिश करते हैं, वहीं सिरमौर के राजगढ़ में एक व्यापारी ने ईमानदारी और इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। दुकान पर छूटा करीब दो लाख रुपये कीमत का सोने का मंगलसूत्र देखकर भी दुकानदार का ईमान नहीं डिगा। उन्होंने आभूषण को सुरक्षित रखा और जब उसका मालिक वापस पहुंचा तो बिना किसी लालच के मंगलसूत्र उसे सौंप दिया।
राजगढ़ शहर के पुराने व्यापारी कैलाश वल्ल्याट की दुकान पर एक ग्राहक खरीदारी के लिए आया था। खरीदारी के दौरान अनजाने में उसका मंगलसूत्र वहीं छूट गया। ग्राहक को उस समय इसका एहसास नहीं हुआ और वह दुकान से चला गया। कुछ समय बाद कैलाश वल्ल्याट की नजर दुकान में पड़े आभूषण पर गई। जब उन्होंने उसकी कीमत का अंदाजा लगाया तो यह कोई सामान्य वस्तु नहीं, बल्कि करीब दो लाख रुपये मूल्य का सोने का मंगलसूत्र था।
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मंगलसूत्र की कीमत इतनी थी कि कोई भी व्यक्ति पलभर के लिए लालच में पड़ सकता था, लेकिन कैलाश वल्ल्याट ने उसे अपने पास रखने के बजाय सुरक्षित रख लिया। उन्होंने तय किया कि जिस व्यक्ति का यह आभूषण है, उसे ही वापस किया जाएगा। उनके लिए यह केवल सोने का आभूषण नहीं था, बल्कि किसी व्यक्ति की मेहनत की कमाई और परिवार से जुड़ी भावनाओं का हिस्सा था।
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कुछ समय बाद ग्राहक को जब अपने मंगलसूत्र के दुकान में छूटने का पता चला तो वह वापस कैलाश वल्ल्याट के पास पहुंचा। आभूषण के खो जाने से परेशान ग्राहक को जब पता चला कि मंगलसूत्र सुरक्षित है तो उसकी चिंता खुशी में बदल गई। कैलाश वल्ल्याट ने बिना किसी शर्त या लालच के वह मंगलसूत्र उसके वास्तविक मालिक को लौटा दिया। कीमती आभूषण वापस मिलने पर ग्राहक ने व्यापारी का आभार जताया।
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करीब दो लाख रुपये का मंगलसूत्र लौटाने की यह घटना अब राजगढ़ में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोग कैलाश वल्ल्याट के इस कदम की जमकर सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इतनी कीमत की वस्तु मिलने के बाद भी उसे अपने पास रखने के बजाय मालिक तक पहुंचाना बताता है कि ईमानदारी और इंसानियत आज भी समाज में जिंदा है।
कैलाश वल्ल्याट राजगढ़ के पुराने व्यापारियों में शामिल हैं और लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वह राजगढ़ के प्रसिद्ध बैसाखी मेले के दौरान कई वर्षों से गांवों और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले लोगों व श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन करते रहे हैं। जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता के कारण भी वह स्थानीय लोगों के बीच अपनी अलग पहचान रखते हैं।