हमीरपुर/बड़सर। हिमाचल प्रदेश की राजनीति को रविवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और बड़सर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे राम रतन शर्मा का निधन हो गया। करीब 91 वर्ष की उम्र में उन्होंने मैहरे स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे राम रतन शर्मा के निधन की खबर फैलते ही बड़सर से लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई।

 

अपने सरल, सहज और मिलनसार व्यवहार के लिए पहचाने जाने वाले राम रतन शर्मा ने अपने राजनीतिक जीवन में क्षेत्र की जनता के बीच मजबूत पहचान बनाई। उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को उनके आवास पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।

दो बार विधानसभा पहुंचे थे राम रतन शर्मा

राम रतन शर्मा का जन्म वर्ष 1935 में हुआ था। वह तत्कालीन नादौनता विधानसभा क्षेत्र, जिसे अब बड़सर विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, से भाजपा के टिकट पर दो बार विधानसभा पहुंचे। उन्होंने 1982 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया। इसके बाद वर्ष 1990 में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की और क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व किया।

 

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लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहने के कारण संगठनात्मक राजनीति में भी उनका गहरा अनुभव था। जनसंघ के दौर से भाजपा तक उन्होंने संगठन के लिए काम किया और जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में भूमिका निभाई।

राजनीति के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी छोड़ी छाप

राम रतन शर्मा को केवल राजनीतिक जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भी याद किया जाएगा। बड़सर क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार की दिशा में उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जाता है। दीनदयाल उपाध्याय बीएड कॉलेज की स्थापना को उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। इस संस्थान के माध्यम से क्षेत्र के अनेक युवाओं को शिक्षक बनने और अपने करियर को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। राजनीति से अलग भी वह समाजसेवा से जुड़े रहे और लोगों के बीच उनकी सहज उपलब्धता तथा सरल व्यवहार के कारण उनका विशेष सम्मान था।

 

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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से भी रहा जुड़ाव

राम रतन शर्मा का जुड़ाव श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन से भी रहा। अयोध्या आंदोलन के दौरान उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा वह पतंजलि योगपीठ से भी जुड़े रहे और योग एवं स्वस्थ जीवनशैली को लेकर लोगों को जागरूक करने का कार्य करते रहे। उनके समर्थकों और परिचितों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए उन्होंने राजनीति को समाजसेवा के माध्यम के रूप में देखा और क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयासरत रहे।

 

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अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, विधायक ने दिया अर्थी को कंधा

राम रतन शर्मा के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल हुए। माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया, जब बड़सर के भाजपा विधायक इंद्र दत्त लखनपाल ने राम रतन शर्मा की अर्थी को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। पूर्व विधायक मनजीत सिंह डोगरा, जिला परिषद उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह, बड़सर भाजपा मंडल अध्यक्ष संजीव कुमार सहित कई नेता और पार्टी पदाधिकारी भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। पुलिस विभाग के कर्मचारी भी अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित रहे।

 

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सभी दलों में था सम्मान

राम रतन शर्मा के निधन पर भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं और क्षेत्र के अन्य लोगों ने भी शोक व्यक्त किया। नेताओं ने उन्हें एक अनुभवी, सहज और जमीन से जुड़े हुए जननेता के रूप में याद किया। राम रतन शर्मा के निधन से हिमाचल भाजपा ने अपने एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता को खो दिया है। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के लिए उनका निधन एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसमें राजनीति के साथ समाज और शिक्षा के प्रति समर्पण भी शामिल रहा।

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