शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में हुई बारिश के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। जगह-जगह भूस्खलन, उफनते नाले और बंद सड़कें जनजीवन पर असर डाल रही हैं। सबसे ज्यादा चिंता किसानों की है, क्योंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने से नगदी फसलें समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे में लगातार बारिश का पूर्वानुमान किसानों की चिंता और बढ़ा रहा है।
धर्मशाला में झमाझम बारिश, बाजार में घुसा पानी
गुरुवार दोपहर धर्मशाला में तेज बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। कुछ ही देर की बारिश से बाजार के कई हिस्सों में जलभराव हो गया और कई दुकानों में पानी घुस गया। दुकानदारों को सामान सुरक्षित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बारिश के कारण बाजारों में लोगों की आवाजाही भी प्रभावित रही।
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भरमौर में उफना नाला, श्रद्धालु और स्कूली बच्चे फंसे
चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में स्थित बन्नी नाला अचानक उफान पर आ गया। जलस्तर बढ़ने से नाले के दोनों ओर श्रद्धालु, स्कूली बच्चे और कुछ वाहन फंस गए। हालांकि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन अचानक बढ़े जलस्तर ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी।
अगले छह दिन तक राहत के आसार नहीं
भारत मौसम विज्ञान विभाग ;आईएमडीद्ध के अनुसार प्रदेश में अगले छह दिनों तक यानी पांच अगस्त तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। कई जिलों में अलग.अलग दिनों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कल 31 जुलाई को प्रदेश के बिलासपुर, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिला में तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।
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जबकि एक अगस्त को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सोलन जिला, में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसी तरह से दो अगस्त को चंबा, कांगड़ा, शिमला और सिरमौर जिला तथा तीन अगस्त को चंबा, कांगड़ा व मंडी जिला में येलो अलर्ट की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी.नालों से दूर रहने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी है।
बंद सड़कें किसानों पर बन रहीं आफत
लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में कई सड़कें बंद पड़ी हैं। सड़क संपर्क बाधित होने से सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। नगदी फसलें समय पर मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद खराब होने लगे हैं। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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130 सड़कें अब भी बंद, बिजली और पेयजल सेवाएं प्रभावित
बारिश के चलते प्रदेश में करीब 130 सड़कें अभी भी बंद हैं। इसके अलावा 10 बिजली ट्रांसफार्मर और 30 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हैं। संबंधित विभाग सड़कों को बहाल करने और बिजली-पानी की सेवाएं सुचारु करने में जुटे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में चुनौती बनी हुई है।
धर्मशाला में सबसे अधिक वर्षा दर्ज
मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेश में सबसे अधिक 27.1 मिलीमीटर बारिश धर्मशाला में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा नाहन में 8.4 मिमी, कांगड़ा में 6.8 मिमी और मंडी में 1.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वहीं शिमला के ढली क्षेत्र में भूस्खलन के कारण एक वाहन को भी नुकसान पहुंचा।
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मानसून में सामान्य से कम बारिश, लेकिन खतरा बरकरार
हालांकि पूरे मानसून सीजन की बात करें तो प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद कई जिलों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने से भूस्खलन, जलभराव और सड़क अवरुद्ध होने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
बारिश का यह दौर जहां एक ओर गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन, यातायात और खेती-किसानी के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की अपील कर रहा है।
