राजगढ़ (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से एक बेहद भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के परिचालक एवं राजगढ़ बस अड्डे के अड्डा प्रभारी सुरेंद्र ठाकुर का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। गुरुवार को उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान और नम आंखों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन उनकी अंतिम विदाई का दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया।
फूलों से सजी बस में दी गई आखिरी सलामी
एचआरटीसी ने अपने साथी को ऐसी श्रद्धांजलि दी, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो उठा। जिस बस में सुरेंद्र ठाकुर ने वर्षों तक परिचालक के रूप में हजारों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया, उसी बस में उनकी पार्थिव देह को उनके पैतृक गांव पहुंचाया गया। निगम कर्मचारियों ने बस को फूलों से सजाया और अपने दिवंगत साथी को अंतिम सलामी दी। अपनी ही ड्यूटी वाली बस में अंतिम यात्रा पर निकले सुरेंद्र ठाकुर को देखकर अधिकारियों, कर्मचारियों, परिजनों और स्थानीय लोगों की आंखें भर आईं।
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जानकारी के अनुसार, विकासखंड राजगढ़ की नेहर पाब पंचायत के जुब्बल गांव निवासी सुरेंद्र ठाकुर पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास्थ्य कारणों के चलते उन्हें नियमित परिचालक की ड्यूटी से हटाकर राजगढ़ बस अड्डे में अड्डा प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इलाज के बाद वह हाल ही में दोबारा ड्यूटी पर लौटे थे।
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दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत
बुधवार रात उन्होंने अपनी नाइट ड्यूटी पूरी की और आराम करने के लिए अपने कमरे में चले गए। गुरुवार सुबह जब एक चालक उन्हें अगली ड्यूटी के लिए बुलाने पहुंचा तो वह अचेत अवस्था में मिले। उन्हें तुरंत नागरिक अस्पताल राजगढ़ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।
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सहकर्मियों का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में ईमानदारी और समर्पण के साथ जिम्मेदारियां निभाईं। यात्रियों के प्रति उनका व्यवहार हमेशा सौम्य और सहयोगपूर्ण रहा, जिसके कारण वे स्टाफ और आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे।
निगम ने परिवार को दी फौरी राहत
इस दुखद घटना के बाद राजगढ़ बस अड्डे पर शोक का माहौल छा गया। एचआरटीसी प्रबंधन ने शोक संतप्त परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये की फौरी राहत राशि भी प्रदान की। वहीं अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में निगम कर्मचारी, अधिकारी, स्थानीय लोग और शुभचिंतक मौजूद रहे, जिन्होंने नम आंखों से अपने प्रिय साथी को अंतिम विदाई दी। सुरेंद्र ठाकुर की अंतिम यात्रा ने यह संदेश भी दिया कि वर्षों तक यात्रियों की सेवा करने वाले एक कर्मठ कर्मचारी को उसके अपने साथियों ने पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ विदा किया। यह भावुक दृश्य लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।
