कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में VB-G RAM G योजना के तहत विकास कार्यों में सामग्री खरीद और उसके भुगतान को लेकर ग्रामीण विकास विभाग ने नियम और कड़े कर दिए हैं। विभाग ने पंचायतों और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सामग्री की खरीद, बिलों की जांच और भुगतान की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार ही पूरी की जाए। खास तौर पर अग्रिम भुगतान पर रोक लगाई गई है।

भुगतान से पहले होगी लेनदेन की जांच

ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक एवं आयुक्त VB-G RAM G राघव शर्मा ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, अतिरिक्त उपायुक्तों, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारियों, जिला विकास अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।

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विभाग ने कहा है कि योजना के तहत सामग्री भुगतान को अधिकृत करने की जिम्मेदारी लेखाकार और BDO की होगी। दोनों क्रमशः प्रथम और द्वितीय हस्ताक्षरकर्ता रहेंगे। भुगतान जारी करने से पहले संबंधित लेनदेन की वास्तविकता, दस्तावेजों और राशि की शुद्धता की जांच करना अनिवार्य होगा।

सीमेंट के अलावा किसी सामान का एडवांस नहीं

नई व्यवस्था में साफ किया गया है कि सीमेंट को छोड़कर किसी भी सामग्री के लिए अग्रिम राशि जारी नहीं की जाएगी। सीमेंट की आपूर्ति मिलने के बाद राज्य नागरिक आपूर्ति निगम से विधिवत बिल लेना होगा और उसे रिकॉर्ड में सुरक्षित रखते हुए ऑडिट के लिए उपलब्ध कराना होगा। यदि किसी अन्य सामग्री के लिए अग्रिम भुगतान किए जाने का मामला सामने आता है तो सामग्री सूची तैयार करने वाले कर्मचारी के साथ भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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विभाग ने सामग्री खरीद को श्रमिक भुगतान की प्रक्रिया से भी जोड़ा है। संबंधित कार्य के श्रमिकों के मस्टररोल का भुगतान स्वीकृत होने के बाद ही सामग्री सूची तैयार की जाएगी। मस्टररोल बंद होने के बाद तकनीकी कर्मचारियों द्वारा कार्यस्थल पर दर्ज माप के आधार पर मजदूरी का भुगतान तीन दिन के भीतर करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिल-वाउचर सीधे BDO तक भेजने होंगे

ग्राम रोजगार सेवक या पंचायत सचिव जब सामग्री की सूची तैयार करेंगे तो संबंधित बिल और वाउचर की प्रतियां सरकारी ई-मेल के जरिए BDO को भेजनी होंगी। दस्तावेजों में यह प्रमाणित करना जरूरी होगा कि सामग्री वास्तव में खरीदी गई है, स्टॉक रजिस्टर में उसकी एंट्री की गई है और खरीद से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। साथ ही यह भी प्रमाणित करना होगा कि सामग्री संबंधित कार्य में इस्तेमाल हुई है।

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विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्य पूरा होने और मस्टररोल बंद होने के बाद नई सामग्री नहीं खरीदी जा सकेगी। हालांकि, पहले खरीदी जा चुकी और कार्य में इस्तेमाल सामग्री का भुगतान नियमानुसार किया जा सकता है। मेजरमेंट बुक और स्टॉक रजिस्टर में सामग्री की खपत दर्ज किए बिना भुगतान अधिकृत नहीं होगा। खरीद प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश वित्तीय नियम, 2009 और हिमाचल प्रदेश पंचायती राज वित्तीय नियम, 2012 के प्रावधानों के अनुरूप करनी होगी।

ज्यादा भुगतान हुआ तो BDO की जवाबदेही

VB-G RAM G के कार्यों में मजदूरी और सामग्री का 60:40 अनुपात बनाए रखना भी अनिवार्य किया गया है। यह नियम खंड स्तर के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्तिगत कार्य पर भी लागू होगा। तकनीकी स्वीकृति के समय इस अनुपात की जांच होगी। यदि किसी कार्य में सामग्री की लागत 40 प्रतिशत से अधिक है तो एस्टीमेट में अतिरिक्त लागत के स्रोत का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।

विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अनुपात का उल्लंघन कर किसी लाभार्थी को अतिरिक्त भुगतान किया जाता है तो संबंधित खंड विकास अधिकारी जिम्मेदार होंगे। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त राशि नियमानुसार संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी से वसूल की जाएगी। खंड कार्यक्रम अधिकारी और जिला कार्यक्रम समन्वयक को नियमित रूप से 60:40 अनुपात की समीक्षा करनी होगी।

नए निर्देशों का सख्ती से करना होगा पालन

वहीं तकनीकी सहायक और कनिष्ठ अभियंताओं को भी कार्यों में इस अनुपात की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत केवल अनुमत कार्यों से जुड़ी सामग्री ही खरीदी जा सकेगी और सभी संबंधित अधिकारियों को नए निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा ने दिशा-निर्देश जारी किए जाने की पुष्टि की है।

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