शिमला। सुक्खू सरकार के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर फ्यूल चार्ज का अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। सब्सिडी सीमित होने के बाद अब बिजली बिलों में फ्यूल चार्ज जोड़ा जा रहा है, जिससे आम लोगों का मासिक खर्च बढ़ गया है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर परेशान हैं।
फ्यूल चार्ज से बढ़ा मासिक खर्च
अब बिजली बिल में हर महीने 50 से 200 रुपये तक फ्यूल चार्ज जोड़ा जा रहा है। यह चार्ज अलग से वसूला जा रहा है, जिससे कुल बिल की राशि बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि पहले ही बिजली महंगी लग रही थी, अब इस अतिरिक्त चार्ज ने और बोझ बढ़ा दिया है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल मौसम : 10 जिलों के लिए आंधी-तूफान का अलर्ट जारी, जानें कब तक आसमान से बरसेगी आफत
पहले से ही कई तरह के टैक्स और शुल्क
बिजली बिल में सिर्फ यूनिट का पैसा ही नहीं लगता, बल्कि पहले से ही कई छोटे-छोटे शुल्क जुड़े हुए हैं। इसमें प्रति यूनिट 10 पैसे मिल्क सेस, 2 पैसे पर्यावरण उपकर और अन्य नियामकीय शुल्क शामिल हैं। अब इन सबके साथ फ्यूल चार्ज भी जुड़ने से कुल बिल और ज्यादा बढ़ गया है।
स्मार्ट मीटर की लागत भी उपभोक्ताओं पर
प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर की लागत भी उपभोक्ताओं से किस्तों में वसूली जा रही है। इसका असर भी हर महीने के बिल पर दिखाई दे रहा है। कई उपभोक्ता कह रहे हैं कि उन्हें बिना ज्यादा बिजली इस्तेमाल किए भी ज्यादा बिल देना पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : तेज रफ्तार थार का कहर, स्कूटी को टक्कर मार दुकान में जा घुसी, 26 वर्षीय युवक के निकले प्राण
बिजली सब्सिडी में कटौती
पहले बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा अधिक लोगों को मिलता था, लेकिन अब इसे सीमित कर दिया गया है और यह सिर्फ दो मीटर तक ही रह गई है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि कई परिवारों को पहले जितनी राहत मिलती थी, अब वह नहीं मिल रही।
आम लोगों की बढ़ी परेशानी
गांव और शहर दोनों जगह लोग बढ़े हुए बिजली बिल से परेशान हैं। उनका कहना है कि घरेलू खर्च पहले से ही ज्यादा हैं और ऊपर से बिजली बिल में बढ़ोतरी ने बजट बिगाड़ दिया है। खासकर मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है।
बिजली बोर्ड का पक्ष
बिजली बोर्ड का कहना है कि बिल में जो बढ़ोतरी हो रही है, वह बिजली खपत बढ़ने और नियामकीय शुल्कों की वजह से है। बोर्ड के अनुसार सभी चार्ज नियमों के तहत ही लगाए जा रहे हैं और इसमें कोई अतिरिक्त मनमानी नहीं की जा रही है।
फ्यूल चार्ज क्यों लिया जा रहा है
सरकारी बिजली आपूर्ति कम होने और मांग ज्यादा होने की वजह से बोर्ड को दूसरे राज्यों से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। खासकर गर्मियों में बिजली की मांग काफी बढ़ जाती है। इसी अतिरिक्त खर्च को पूरा करने के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज कास्ट एडजस्टमेंट यानी फ्यूल चार्ज उपभोक्ताओं से लिया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: हिमाचल में भीषण हा.दसा: पार्वती नदी में गिरा पर्यटक वाहन, 3 की मौ*त; दो घायल
अभी कितना फ्यूल चार्ज लिया जा रहा है
प्रदेश में फिलहाल बिजली बिल पर फ्यूल चार्ज करीब 34 पैसे प्रति यूनिट की दर से लिया जा रहा है। यह व्यवस्था वर्ष 2024 में स्वीकृत नियमों के तहत लागू है। इसके चलते उपभोक्ताओं के बिजली बिल में पहले से ही थोड़ा अतिरिक्त खर्च जुड़ रहा है।
अब 4 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ाने का प्रस्ताव
अब सरकार ने फ्यूल चार्ज को बढ़ाकर करीब 4 रुपये प्रति यूनिट तक करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग के पास भेजा गया है। अगर आयोग इसे मंजूरी दे देता है, तो आने वाले समय में बिजली उपभोक्ताओं के बिल में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
यह भी पढ़ें : सावधान हिमाचल! अगले 24 घंटे फ्लैश फ्लड का अलर्ट, 5 जिलों में होगी भारी बारिश -तूफान
उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए नई व्यवस्था
हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए अतिरिक्त उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच में स्वतंत्र सदस्यों की नियुक्ति की है। आयोग के अनुसार इसका मकसद लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान करना है ताकि उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। यह व्यवस्था खास तौर पर चार ऑपरेशन सर्किलों में लागू की गई है, जिसमें ऊना, रामपुर, नाहन और रोहड़ू शामिल हैं।
किन क्षेत्रों के लिए नियुक्ति हुई
इन सर्किलों के लिए अलग-अलग स्वतंत्र सदस्य नामित किए गए हैं। ऊना के लिए इंजीनियर बलराज, रामपुर के लिए अधिवक्ता कमल देव, नाहन के लिए रघुवीर सिंह मेहता और रोहड़ू के लिए कमल दिलाइक को जिम्मेदारी दी गई है। इन सभी का कार्यकाल तीन साल का रहेगा। हालांकि यदि कोई सदस्य 65 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है तो उसका कार्यकाल अपने आप समाप्त मान लिया जाएगा।
