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July 26, 2026
हिमाचल में सेब खाने से चली गई व्यक्ति की जा.न, बगीचे में जमीन से उठाकर खाया; घास पर की थी स्प्रे
जमीन पर गिरे सेब को बिना धोए खाया, अस्पताल में उपचार के दौरान तोड़ा दम
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कुल्लू। कहते हैं कि रोज एक सेब खाओ, डॉक्टर को दूर भगाओ, लेकिन कुल्लू जिला से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। यहां एक व्यक्ति की सेब खाने से ही मौत हो गई है। दरअसल व्यक्ति ने व्यक्ति की कथित तौर पर केमिकल युक्त सेब खाने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बगीचे में घास पर छिड़के गए रसायन के संपर्क में आए सेब को बिना धोए खाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। कई दिनों तक अस्पतालों में इलाज चलने के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। इस घटना ने बागवानों और आम लोगों को भी सतर्क कर दिया है कि रसायनों के छिड़काव के बाद फलों का सेवन कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
मामला कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल का है। जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान राम लाल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह बगीचे में जमीन पर गिरे सेब उठा कर खा गए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन सेबों पर पहले किए गए रासायनिक छिड़काव का असर था, जिससे उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई।
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परिजनों के अनुसार, सेब खाने के बाद राम लाल की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उन्हें पहले बंजार अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू रेफर किया। वहां से भी स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नेरचौक भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
मृतक की पत्नी हीरा देवी ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 15 जुलाई को बगीचे में घास सुखाने के लिए रसायन का छिड़काव किया गया था। अगले दिन उनके पति बगीचे में गए और जमीन पर पड़े सेब बिना धोए खा लिए। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई और आखिरकार उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद विसरा सुरक्षित रख लिया है, ताकि मौत के सही कारणों की वैज्ञानिक जांच की जा सके। प्रारंभिक जांच में मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। परिजनों ने भी किसी पर संदेह या किसी तरह की साजिश से इनकार किया है।
कुल्लू के पुलिस अधीक्षक मदन लाल कौशल ने बताया कि मामले की जांच जारी है। पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि कृषि और बागवानी में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के छिड़काव के बाद फलों का सेवन बिना अच्छी तरह धोए या निर्धारित सुरक्षा अवधि पूरी किए बिना नहीं करना चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।