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July 31, 2026
हिमाचल: पति से गुजारा भत्ता मांगने वाली स्टाफ नर्स को कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, सुनाया बड़ा फैसला
कोर्ट ने कहा आर्थिक रूप से सक्षम महिला पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की फैमिली कोर्ट ने गुजारा भत्ते से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। पति से अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे का खर्च दिलाने की मांग लेकर अदालत पहुंची एक सरकारी स्टाफ नर्स को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने साफ कहा कि जो महिला स्वयं अच्छी आय अर्जित कर रही है और आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम है, उसे पति से गुजारा भत्ता देने का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट के इस फैसले को पारिवारिक मामलों में एक अहम कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
मामला सुंदरनगर स्थित अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट में विचाराधीन था। याचिकाकर्ता महिला ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-24 के तहत आवेदन दायर करते हुए पति से 30 हजार रुपये मुकदमे का खर्च और 10 हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने की मांग की थी। महिला का दावा था कि उसके पास मुकदमा लड़ने और अपने खर्च पूरे करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, जबकि उसका पति जिम का संचालन करता है और अच्छी आय अर्जित करता है।
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सुनवाई के दौरान पति की ओर से अदालत को बताया गया कि पत्नी सरकारी नौकरी में कार्यरत है। वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सब-इंस्पेक्टर (स्टाफ नर्स) के पद पर तैनात है और उसका मासिक मूल वेतन ही 56 हजार रुपये से अधिक है। ऐसे में उसे आर्थिक रूप से असहाय नहीं माना जा सकता।
अदालत ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत आय, संपत्ति और अन्य दस्तावेजों का विस्तार से परीक्षण किया। रिकॉर्ड के आधार पर न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि महिला नियमित सरकारी सेवा में है, सम्मानजनक वेतन प्राप्त कर रही है और अपने खर्च स्वयं वहन करने में पूरी तरह सक्षम है।
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फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और आश्रित पक्ष को राहत देना होता है। यदि आवेदक स्वयं पर्याप्त आय अर्जित कर रहा है और अपने जीवन-यापन के लिए किसी पर निर्भर नहीं है, तो उसे पति से अंतरिम गुजारा भत्ता या मुकदमे का खर्च दिलाने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बनता।
इन्हीं तथ्यों और कानूनी आधारों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने महिला की अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमा खर्च से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर व्यक्ति को केवल वैवाहिक विवाद के आधार पर गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता।
मंडी फैमिली कोर्ट का यह फैसला अब कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि गुजारा भत्ता का अधिकार परिस्थितियों और आर्थिक निर्भरता पर आधारित होता है, न कि केवल पति-पत्नी के संबंध पर।