शिमला। जिन बच्चों के सिर पर मां-बाप का साया नहीं होता, उन्हें इस कठिन दुनिया में एक-एक कदम बढ़ाना भी पहाड़ तोड़ने जैसा लगता है। ऐसे में जब कोई मदद का हाथ बढ़ाता है तो राहत की सांस आती है। ऐसा ही कुछ कर रही है हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार।
27 साल तक सरकार उठाएगी खर्च
सुक्खू सरकार ने एक विशेष योजना चला रखी है जिसका उद्देश्य अनाथ बच्चों को बेहतर जीवन, शिक्षा, और सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना के तहत जब तक बच्चा 27 वर्ष का नहीं हो जाता, तबतक सरकार उस अनाथ बच्चे की जिम्मेदारी निभाएगी।
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बच्चों के लिए रिजर्व की जा रही सीटें
योजना के अंतर्गत सरकार बच्चों की पढ़ाई के लिए मदद कर रही है। बच्चों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। विभिन्न पाठ्यक्रमों में अनाथ बच्चों के लिए सीट्स रिजर्व की जाती हैं।
विभिन्न यात्राओं पर भेजे जा रहे बच्चे
योजना के अंतर्गत सरकार बच्चों को देश के ऐतिहासिक व प्रसिद्ध जगहों पर भी भेज रही है। इसमें हवाई सफर, तीन सितारा होटल में ठहरना व अन्य खर्चे सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं। इससे बच्चों को दुनिया देखने-समझने का मौका मिल रहा है।
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राज्य के बच्चे घोषित हुए अनाथ बच्चे
वहीं सरकार ने अनाथ बच्चों को "चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट" भी घोषित किया है। इससे उन्हें सरकारी संरक्षण, सुरक्षा और विकास के समान अवसर मिल रहे हैं। ये पहल उन्हें आत्मविश्वास और गरिमा के साथ जीवन जीने का हक दे रही है।
पहला राज्य जिसने बनाया ये कानून
इस योजना के साथ हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है जिसने अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए विशेष कानून बनाया है। इसके तहत बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित किया जा रहा है।
