#अपराध
November 28, 2025
हिमाचल में फौजी स्कीम के नाम पर करोड़ों का घपला : मोटी कमाई के लालच में फंसे जवान
पैसा लगाइए, कुछ महीनों में रकम दोगुनी हो जाएगी
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ऊना। हिमाचल के शांत पहाड़ों में फौजियों की वर्दी पर लगे मेडल भी उस छल को नहीं पहचान पाए जो ‘खास स्कीम’ के नाम पर रचा गया था। ऊना से कांगड़ा और हमीरपुर से बिलासपुर। चार जिलों में 327 से ज्यादा लोग इस स्कीम के झांसे में फंस गए।
इस शुरुआत होती थी चमकदार सेमिनारों से और अंत होता था खाली खातों से। जिस स्कीम को सिर्फ फौजियों के लिए बताया गया, वही बनी सबसे बड़ा जाल और जिस भरोसे को जिंदगी भर देश की रक्षा में निभाया गया उसी भरोसे का हुआ सबसे बड़ा सौदा।
कहानी शुरू होती है लखनऊ की एक कंपनी 'श्रेया इंफ्रा मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड' से। ठगों ने एक खास योजना बनाई, जिसका निशाना कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि देश की सेवा से रिटायर हुए भोले-भाले फौजी थे। उन्होंने प्रचार किया कि "यह स्कीम सिर्फ फौजियों के लिए है," ताकि जवानों को खास महसूस कराया जा सके और उनका भरोसा जीता जा सके।
जालसाजों ने हेमंत कुमार राय, संगीता राय, श्रेया राय, राजेश कुमार सिंह, रेखा, अवधेश कुमार सिंह, सरिता यादव समेत कंपनी से जुडे फौजियों को एक हसीन सपना दिखाया। वादा किया गया कि आप पैसा लगाइए, 15 से 18 महीने में रकम दोगुनी हो जाएगी। साथ ही आपको जमीन का प्लॉट भी दिया जाएगा। कंपनी ने 327 से अधिक लोगों से 6.09 करोड़ रुपये जमा करवाए और 14.41 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की।
इस ठगी की सबसे शातिर बात यह थी कि कंपनी ने फौजियों का भरोसा जीतने के लिए सेना के अधिकारी स्तर के लोगों को पहले अपने जाल में फंसाया और उन्हें अपना एजेंट बनाया। मकसद जब बड़े साहब कहेंगे, तो निचले रैंक के फौजी बिना सवाल किए भरोसा कर लेंगे। माहौल होटलों में बड़ी-बड़ी मीटिंग्स और स्टार पार्टियों का आयोजन कर चमक-धमक दिखाई गई।
शुरुआत में कंपनी ने कुछ लोगों को थोड़ा रिटर्न देकर भरोसा पक्का किया, ताकि और लोग पैसा लगाएं। लेकिन जब हिसाब का वक्त आया, तो सच्चाई सामने आई। फौजियों को जो प्लॉट दिखाए गए थे, वे सिर्फ कागजों में थे, जमीन पर नहीं। फर्जी रसीदें और रजिस्ट्रेशन के नाटक रचे गए। जब पैसे वापस मांगे गए, तो आरोपी एक-दूसरे पर इल्जाम लगाकर भागने लगे।
धोखाधड़ी का अहसास होने पर 15 पूर्व फौजियों ने गगरेट थाना का दरवाजा खटखटाया। पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि ठगों ने हिमाचल के चार जिलों में अपना नेटवर्क फैला रखा था। SDPO अंब, अनिल पटियाल के अनुसार चिटफंड कंपनियों में पैसा निवेश करते समय जांच जरूर करनी चाहिए। फिलहाल मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।