मनाली/शिमला। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल अटल टनल रोहतांग के पास रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों से अचानक एक विशाल हिमखंड टूटकर नीचे आ गिरा। उस वक्त बड़ी संख्या में पर्यटक बर्फ के बीच मस्ती कर रहे थे और मौसम साफ होने के कारण इलाके में चहल-पहल भी ज्यादा थी। लेकिन कुछ ही क्षणों में माहौल बदल गया और जहां लोग प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे थे, वहीं अचानक डर और भगदड़ का माहौल बन गया।

तेज गर्जना और सफेद गुबार से दहल उठा इलाका

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हिमखंड के गिरते ही जोरदार गर्जना सुनाई दी, जिसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। इसके तुरंत बाद पहाड़ी से एक विशाल सफेद गुबार धुएं की तरह तेजी से नीचे की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दिया। यह बर्फीला गुबार हवा के साथ फैलता हुआ नीचे खड़े पर्यटकों तक पहुंच गया। कुछ क्षणों के लिए ऐसा लगा मानो पूरा क्षेत्र बर्फ की धूल से ढक गया हो। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दीं और कई लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे।

 

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पर्यटकों में मची अफरा-तफरी

घटना के समय चंद्रा नदी के पार और अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास भारी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। जैसे ही हिमखंड गिरता नजर आया, वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े। इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों और समझदार पर्यटकों ने स्थिति को भांपते हुए सीटी बजाकर और जोर-जोर से आवाजें लगाकर अन्य लोगों को आगाह किया। उनकी सतर्कता के कारण कई लोग समय रहते खतरे वाले क्षेत्र से दूर हो गए और एक बड़ा हादसा टल गया।

 

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पहले ही दी गई थी चेतावनी, फिर भी पहुंचे पर्यटक

गौरतलब है कि इस घटना से दो दिन पहले ही सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस क्षेत्र में हिमस्खलन की आशंका जताई थी। इसके बाद लाहौल-स्पीति प्रशासन ने अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के पास पर्यटन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। बावजूद इसके कुछ पर्यटक चेतावनी को नजरअंदाज कर वहां पहुंच गए, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ गई। प्रशासन ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वे निर्देशों का पालन करें और प्रतिबंधित क्षेत्रों में न जाएं।

 

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मौसम के बदलते मिजाज से बढ़ा खतरा

अप्रैल महीने की शुरुआत में हुई ताजा बर्फबारी और मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण मनाली और लाहौल घाटी में हिमस्खलन का खतरा काफी बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में धूप खिलने और रात में तापमान गिरने से बर्फ की परतें कमजोर हो जाती हैं, जिससे इस तरह के हिमखंड अचानक खिसक सकते हैं। यही कारण है कि इन दिनों प्रशासन लगातार सतर्कता बरतने की सलाह दे रहा है।

ओलावृष्टि से बागवानों पर दोहरी मार

उधर, प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मौसम ने कहर बरपाया है। शिमला और मंडी के ऊपरी इलाकों में हुई भारी ओलावृष्टि ने सेब और अन्य गुठलीदार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर सेब के पौधों पर लगी सुरक्षा जालियां तक टूट गई हैं और फसल को गंभीर क्षति पहुंची है। बागवानों का कहना है कि इस नुकसान से उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है और अब उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

 

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मुआवजे की मांग और बढ़ी चिंता

ओलावृष्टि से हुए नुकसान के बाद बागवानों ने सरकार से फसलों का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि समय पर राहत नहीं मिली, तो छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा।

कब तक सताएगा मौसम

वहीं मौसम विभाग ने 9 अप्रैल तक मौसम खराब रहने की चेतावनी दी है और 7 व 8 अप्रैल को भारी बारिश व ओलावृष्टि को लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया गया है, जिससे किसानों और बागवानों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

 

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