शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों को लेकर एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिवार ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है, तो उस परिवार का कोई भी सदस्य पंचायती पद के लिए छह वर्षों तक अयोग्य माना जाएगा।

अतिक्रमण वाले नहीं लड़ सकते चुनाव

यह निर्णय हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 122(1)(सी) के तहत सुनाया गया है। अदालत ने कहा कि जब तक अतिक्रमण की तिथि से 6 वर्ष न बीत जाएं या व्यक्ति अतिक्रमण हटाकर अधिकृत न हो जाए, तब तक वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता।

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परिवार का कोई भी सदस्य नहीं लड़ सकता चुनाव

परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा अगर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो परिवार को कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकता। कोर्ट ने साफ किया है कि अतिक्रमण की भूमि को छोड़ 6 साल बीत जाने के बाद ही कोई सदस्य चुनाव लड़ सकता है।

याचिकाकर्ता का दावा – ‘पिता की गलती मैं क्यों भुगतूं?’

इस मामले में याचिकाकर्ता ने जनवरी 2021 में ग्राम पंचायत बस्सी में उप-प्रधान का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। बाद में दो अलग-अलग चुनाव याचिकाओं के जरिए उनके चुनाव को चुनौती दी गई।

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याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि वह अपने पिता से अलग रहता है और पिता के अतिक्रमण के लिए उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव लड़ना एक कानूनी अधिकार है, जिसे इस प्रकार बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

अतिक्रमण की बात खुद स्वीकारी गई थी

सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि प्राधिकृत अधिकारी ने जांच के बाद यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पिता ने सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण किया था और उन्होंने खुद उस ज़मीन के नियमितीकरण के लिए आवेदन भी किया था। इस आधार पर चुनाव रद्द किए गए। प्राधिकृत अधिकारी ने 21 जनवरी 2024 को याचिकाएं स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को अयोग्य घोषित कर दिया था। कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।

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