मनाली/ शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार लगातार तबाही मचा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से रोजाना भारी बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं। कहीं सड़कें बह रही हैं तो कहीं पुल और संपर्क मार्ग टूटने से गांवों का संपर्क कट रहा है। इसी बीच प्रदेश की पर्यटन नगरी मनाली से बादल फटने की एक और बड़ी घटना सामने आई है, जहां अचानक आई बाढ़ और मलबे ने सेब उत्पादकों की सालभर की मेहनत को कुछ ही मिनटों में बर्बाद कर दिया।
शिलिंग नाले ने बदला रास्ता, मचाई तबाही
मनाली की बुरुआ पंचायत के शिलिंग नाले के ऊपरी क्षेत्र में तेज बारिश के दौरान बादल फटने से अचानक जलस्तर कई गुना बढ़ गया। पानी और मलबे का इतना तेज बहाव आया कि नाले ने अपना पुराना रास्ता छोड़ दिया और सीधे लाछन क्षेत्र के सेब के बगीचों की ओर मुड़ गया। देखते ही देखते बाढ़ जैसा दृश्य बन गया और पानी के साथ आए भारी मलबे ने बागों को अपनी चपेट में ले लिया।
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100 से ज्यादा सेब के पेड़ बहे, कई बगीचे मलबे में दबे
इस प्राकृतिक आपदा में 100 से अधिक सेब के पेड़ बह गए, जबकि कई बगीचे पूरी तरह मलबे में दब गए। स्थानीय बागवानों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। जिन किसानों के बगीचों को सबसे अधिक क्षति पहुंची है उनमें लक्ष्मण महंत, भोला राम, प्रभु दास, रघुबीर, चमन लाल, प्रीतम चंद, कमला देवी, खूब राम और राम चंद शामिल हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से जल्द नुकसान का सर्वे करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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प्रशासन ने शुरू किया नुकसान का आकलन
बुरुआ पंचायत के उपप्रधान चमन महंत ने बताया कि बादल फटने के बाद नाले में अचानक पानी और मलबे का भारी बहाव आया, जिससे पूरी स्थिति बेकाबू हो गई। वहीं एसडीएम मनाली गुंजित सिंह चीमा ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही है। उन्होंने लोगों से बरसात के दौरान नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की अपील भी की है। फिलहाल मनाली की प्रमुख सड़कों पर यातायात सामान्य रूप से जारी है।
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मौत का आंकड़ा 85 पहुंचा, 130 सड़कों पर पहिए थमे
हिमाचल प्रदेश में मानसून का यह सीजन जानलेवा साबित हो रहा है। हाल ही में चंबा में हुए एक सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत के साथ ही राज्य में कुदरती आपदाओं से मरने वालों की संख्या 80 से बढ़कर 85 तक पहुंच गई है।
पहाड़ों से दरकते मलबे (लैंडस्लाइड) की वजह से राज्य की लगभग 130 सड़कें पूरी तरह से बाधित हैं। रास्तों के बंद होने से दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया है, जिससे लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। वहीं सोलन के दाड़लाघाट (फांजी गांव) में बारिश के कारण जमीन धंसने से एक निर्माणाधीन मकान का 50 फीट लंबा डंगा ढह गया, जिससे चार कमरों को भारी नुकसान पहुंचा है।
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राहत कार्य में जुटा प्रशासन, नदी-नालों से दूर रहने की अपील
आपदा की इस घड़ी में एसडीएम मनाली गुंजित सिंह चीमा ने बताया कि राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर नुकसान का सटीक आकलन कर रही हैं। गनीमत यह है कि मनाली की मुख्य सड़कों पर यातायात फिलहाल बहाल है।
5 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने प्रदेश में 5 अगस्त तक कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और किन्नौर के निचले एवं जलग्रहण क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। विभिन्न जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने, नदी-नालों से दूरी बनाए रखने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
बागवानों की चिंता बढ़ी, मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
हिमाचल की अर्थव्यवस्था में सेब उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन लगातार हो रही प्राकृतिक आपदाओं ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। बादल फटना, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ अब पहाड़ी इलाकों में आम होती जा रही हैं, जिससे किसानों की मेहनत और आजीविका दोनों पर संकट गहराता जा रहा है। प्रभावित लोगों को अब राहत और मुआवजे के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए स्थायी उपायों की भी उम्मीद है।
