कांगड़ा। सावन का महीना शुरू होते ही देवभूमि हिमाचल प्रदेश के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है। भगवान शिव की आराधना के लिए लोग दूर-दूर से मंदिरों में पहुंच रहे हैं। हिमाचल के कांगड़ा जिले में भी एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां सावन के महीने में श्रद्धालुओं की खास आस्था देखने को मिलती है। यहां भगवान शिव अर्धनारीश्वर रूप में विराजमान हैं। मंदिर में शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। 

दो भागों में बंटा है शिवलिंग

कांगड़ा जिले के काठगढ़ महादेव मंदिर में स्थापित यह शिवलिंग अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहां शिव और पार्वती के रूप में दो शिवलिंग स्थापित हैं।

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मान्यता है कि दोनों शिवलिंगों के बीच की दूरी समय-समय पर घटती-बढ़ती रहती है। सावन के पवित्र महीने में इस अनोखे शिवलिंग के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।

सिकंदर से भी जुड़ी है मान्यता

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, काठगढ़ महादेव मंदिर का संबंध सिकंदर से भी बताया जाता है। कहा जाता है कि जब सिकंदर अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुए इस क्षेत्र में पहुंचा तो उसने एक फकीर को शिवलिंग की पूजा करते देखा। शिवलिंग के दोनों स्वरूपों के बीच बदलती दूरी को देखकर वह काफी हैरान हुआ।

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मान्यता है कि इस अनोखे शिवलिंग से प्रभावित होकर सिकंदर ने यहां मंदिर बनवाने का निर्णय लिया। इसके लिए उसने टीले पर मंदिर निर्माण के लिए भूमि को समतल करवाया था।

सावन में खास होती है पूजा

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान काठगढ़ महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है। भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। सोमवार और सावन के अन्य विशेष दिनों में मंदिर में भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है।

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शिवरात्रि पर मिल जाते हैं दोनों स्वरूप

मान्यता के अनुसार ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन के साथ शिवलिंग के दोनों भागों के बीच की दूरी में बदलाव आता रहता है। कहा जाता है कि शिवरात्रि के अवसर पर दोनों स्वरूप एक-दूसरे के करीब आकर एक रूप धारण कर लेते हैं। गर्मियों में दोनों भाग अलग-अलग दिखाई देते हैं, जबकि सर्दियों में इनके एक रूप में आने की मान्यता है।

अलग-अलग है दोनों शिवलिंग का आकार

यह शिवलिंग काले-भूरे रंग का बताया जाता है। भगवान शिव के रूप में पूजे जाने वाले शिवलिंग की ऊंचाई करीब 7 से 8 फीट**, जबकि माता पार्वती के स्वरूप वाले शिवलिंग की ऊंचाई करीब 5 से 6 फीट बताई जाती है। यही अनोखा स्वरूप काठगढ़ महादेव मंदिर को श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बनाता है।

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सावन में दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

सावन के महीने में काठगढ़ महादेव मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव के इस अनोखे अर्धनारीश्वर स्वरूप के दर्शन करते हैं और जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि के दौरान यहां तीन दिन तक मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।