शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र कल से धर्मशाला के तपोवन परिसर में शुरू होने जा रहा है। प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अमला आज से ही शिमला से धर्मशाला की ओर रवाना होना शुरू हो गया है।
शीतकालीन सत्र कल से शुरू
आगामी 10 दिनों तक मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और विभागीय अधिकारी तपोवन से ही शासकीय कार्य निपटाएंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी आज शिमला से सत्र के लिए रवाना हो रहे हैं, जबकि अधिकांश मंत्री और विधायकों के आज शाम तक धर्मशाला पहुंच जाने की उम्मीद है।
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अधिकारियों की तैनाती तेज
शीतकालीन सत्र को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। कुछ वरिष्ठ अधिकारी सोमवार को ही धर्मशाला पहुंच चुके हैं, जबकि शेष अधिकारी मंगलवार दोपहर तक पहुंचेंगे। सुरक्षा व्यवस्था, मीडिया प्रबंधन, वाहनों की आवाजाही, VIP मूवमेंट और स्थानीय परिवहन प्रणाली को ध्यान में रखते हुए पुलिस व प्रशासन ने अलग-अलग टीमें तैनात कर दी हैं।
सबसे बड़ा शीतकालीन सत्र
सत्र की अवधि में सचिवालय शिमला में रोजमर्रा की भीड़भाड़ कम रहेगी, क्योंकि अधिकतर विभाग तपोवन में ही कैंप कार्यालय बनाकर कार्य करेंगे। इस बार का शीतकालीन सत्र अब तक का सबसे विस्तृत सत्र माना जा रहा है। सत्र 26 नवंबर से 5 दिसंबर तक चलेगा और इस दौरान कुल 8 बैठकें होंगी।
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5 दिसंबर तक चलेगा सत्र
सत्र के ठीक बाद सरकार 11 दिसंबर को मंडी जिले में आयोजित होने वाले उस बड़े आयोजन की तैयारियों में जुटेगी, जो मुख्यमंत्री सुक्खू के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के अवसर पर होगा। सत्र की व्यस्तताओं के कारण तपोवन के आसपास सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया है और स्थानीय प्रशासन ने पूरे शहर में ट्रैफिक प्रबंधन की नई रूपरेखा लागू की है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष में टकराव
सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों दल विधायक दल की बैठक कर अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम स्वरूप देंगे। सत्ता और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस होने की पूरी संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा का यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद गर्म रहने वाला है।
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कई मुद्दों घेरेगा विपक्ष
विपक्ष ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वह सत्र को सिर्फ औपचारिकता नहीं बनने देगा। विपक्ष कई विषयों को लेकर सदन में सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सत्र के दौरान भाजपा विधायकों का फोकस मुख्य रूप से इन मुद्दों पर रहेगा-
- आपदा प्रबंधन में कथित कमियां
- प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति
- कांग्रेस की चुनावी गारंटियों का क्रियान्वयन
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति
- रोजगार सृजन पर सरकार का रिकॉर्ड
- सड़क नेटवर्क की हालत
- बढ़ती नशा तस्करी और युवाओं पर प्रभाव
- कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित मुद्दे
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सरकार उपलब्धियों के दम पर उतरेगी सदन में
वहीं, सरकार अपने तीन वर्षों के कामकाज को जोर-शोर से सामने रखने की योजना बना चुकी है। सरकार का कहना है कि आपदा राहत, वित्तीय सुधार, गारंटियां, ऊर्जा क्षेत्र में नीतिगत परिवर्तन, सड़कों के आधुनिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। सत्ता पक्ष विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है और विभागवार डोज़ियर भी तैयार किए जा रहे हैं।
तपोवन में सियासी तापमान चढ़ने को तैयार
धर्मशाला का तपोवन मैदान अगले दस दिनों के लिए हिमाचल की राजनीति का केंद्र बनने वाला है। सुरक्षा, रणनीति, राजनीतिक बयानबाजी और सदन में होने वाली गर्मागर्म बहस-ये सभी मिलकर शीतकालीन सत्र को इस बार बेहद महत्वपूर्ण बना रहे हैं।
