शिमला। हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को अभी करीब डेढ़ साल का वक्त बाकी है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा अपने दो दिवसीय शिमला दौरे के बाद वापस दिल्ली लौट गए हैं। लेकिन जाने से पहले वह हिमाचल की राजनीति में एक ऐसी हलचल पैदा कर गए हैं, जिसने कड़ाके की सियासी धूप में राजनीतिक गलियारों का तापमान और बढ़ा दिया है।
लंबे समय से हिमाचल भाजपा के भीतर इस बात को लेकर कई तरह की अटकलें और कयासबाजी चल रही थी कि अगले चुनाव में पार्टी का दूल्हा कौन होगा? इस रेस में कई दिग्गजों के नाम हवा में तैर रहे थे। लेकिन अपने इस दौरे पर आए जेपी नड्डा ने एक ऐसा बड़ा संकेत दे दिया है, जिससे अब चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो चुका है।
सीएम चेहरे में लिया जाता था इन नेताओं का नाम
दरअसल, हिमाचल भाजपा में मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे को लेकर चर्चाओं का दौर अभी से शुरू हो चुका है। लंबे समय से राजनीतिक हलकों में यह सवाल गूंज रहा था कि यदि 2027 में भाजपा सत्ता में वापसी करती है तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा। इस चर्चा में कई बड़े नाम सामने आते रहे हैं। कभी खुद जगत प्रकाश नड्डा का नाम लिया गया, कभी सांसद अनुराग ठाकुर को भविष्य के चेहरे के रूप में देखा गया, तो कभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लेकर भी अटकलें लगती रहीं।
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पार्टी के भीतर और बाहर हर कोई यह जानने को बेताब था कि क्या भाजपा इस बार भी अपनी पुरानी परंपरा (जिसके तहत शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल को दो से अधिक बार सीएम बनने का मौका नहीं मिला) को दोहराएगी या फिर कोई नया समीकरण देखने को मिलेगा?
ओपीएस के बहाने नड्डा का बड़ा इशारा
इस पूरे सस्पेंस पर से पर्दा तब उठा जब शिमला में जेपी नड्डा ने एक बेहद अहम और दूरगामी बयान दिया। उन्होंने राज्य के सबसे संवेदनशील ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के मसले पर भविष्य की रणनीति तय करने का पूरा जिम्मा नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को सौंप दिया। नड्डा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ओपीएस पर आगे क्या करना है और क्या फैसला लेना है] यह निर्णय जयराम ठाकुर और उनके साथ के लोग ही लेंगे।
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आखिर किसकी ओर इशारा कर गए नड्डा
इसके साथ ही उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं हिमाचली हूं, लेकिन मेरी सक्रिय भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में है और मैं दिल्ली में रहकर ही काम करूंगा। नड्डा के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक एक सीधे और स्पष्ट संकेत के रूप में देख रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में हिमाचल भाजपा का मुख्य चेहरा और कमान पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के हाथों में ही रहने वाली है।
एक वर्ग में उत्साह] तो कहीं पसरी खामोशी
इस बड़े सियासी संकेत के बाद प्रदेश भाजपा के भीतर दो तरह की तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। जयराम ठाकुर के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग में भारी उत्साह है। वे इसे केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जयराम ठाकुर के सुशासन और संगठन क्षमता पर जताए गए अटूट भरोसे के रूप में देख रहे हैं।
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दूसरी ओर, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में खुद को शामिल मान रहे अन्य वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों के लिए यह संदेश थोड़ा असहज करने वाला और चौंकाने वाला साबित हुआ है। हालांकि भाजपा में यह परंपरा रही है कि अंतिम मुहर संसदीय बोर्ड लगाता है, लेकिन नड्डा जैसे कद्दावर नेता का सार्वजनिक मंच से यह कहना पूरी कहानी बयां करने के लिए काफी है।
2027 की लड़ाई का ट्रेलर शुरू
भले ही विधानसभा चुनाव अभी दूर हों, लेकिन नड्डा के हिमाचल दौरे ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा ने चुनावी रणनीति को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश की राजनीति में अब यह बहस और तेज हो गई है कि क्या 2027 में भाजपा फिर से जयराम ठाकुर के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरेगी या समय के साथ कोई नया समीकरण सामने आएगा। फिलहाल इतना तय है कि दो दिन के हिमाचल दौरे के बाद दिल्ली लौटे जगत प्रकाश नड्डा एक ऐसा राजनीतिक संदेश छोड़ गए हैं, जिसकी गूंज अब अगले विधानसभा चुनाव तक सुनाई देती रहेगी।
