शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आठवें दिन सदन का माहौल अचानक गरमा गया। प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी विधायकों ने APMC द्वारा दुकानों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए और सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

नहीं बरती गई पारदर्शिता

बतौर रिपोर्टर्स, विपक्ष की ओर से रणधीर शर्मा, सुधीर शर्मा और बलबीर वर्मा ने दुकानों की अलॉटमेंट प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग उठाई। उनका कहना था कि दुकानों को बेहद कम किराए पर बांट दिया गया है और इसमें पारदर्शिता नहीं बरती गई।

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लेकिन जब संबंधित मंत्री ने इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय बार-बार यह कहकर बात टाल दी कि विधायक लिखित शिकायत दर्ज कराएं, तो विपक्षी विधायक भड़क उठे।

नेता प्रतिपक्ष ने लगाया आरोप

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में जानबूझकर पर्दा डाल रही है। उन्होंने कहा कि किसान और बागवानों के हितों की अनदेखी कर गलत तरीके से दुकानों का आवंटन हुआ है और यह सीधा भ्रष्टाचार का मामला है। वहीं विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में तथ्यों के साथ दस्तावेज पेश करते हुए दावा किया कि एपीएमसी शिमला-किन्नौर मंडी की करीब 70 दुकानों का आवंटन किया गया था।

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इसके लिए कुल 133 आवेदन आए थे, जिनमें से 63 आवेदन खारिज कर दिए गए और केवल 70 लोगों को दुकानें दी गईं। आरोप है कि शिलारू, पारला और टूटू स्थित मंडियों में दुकानों को कौड़ियों के भाव किराए पर दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

सरकार ने नहीं उठाया ठोस कदम

विधायक रणधीर शर्मा का कहना था कि, जब इस गड़बड़ी को लेकर दुकानों के आवंटन को रद्द करने की मांग उठाई गई, तब भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नतीजतन, विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और अंततः वॉकआउट कर बाहर आ गया।

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