नाहन। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस द्वारा हाल ही में घोषित 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची संगठन के लिए गले की फांस बनती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की इस नई टीम पर विवादों के काले बादल गहरा गए हैं। अभी ब्लॉक अध्यक्षों में महिलाओं को शून्य प्रतिनिधित्व देने पर पार्टी की वरिष्ठ नेत्रियों का गुस्सा शांत भी नहीं हुआ था कि अब हिमाचल प्रदेश ऑल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी ने भी कांग्रेस के खिलाफ सीधे जंग का ऐलान कर दिया है। 

 

71 ब्लॉक अध्यक्षों में एक भी मुस्लिम नेता को जगह न मिलने से भड़की सोसायटी ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय का अपमान बताते हुए प्रदेश नेतृत्व को गंभीर परिणाम भुगतने की खुली चेतावनी दे दी है।

71 की लिस्ट में मुस्लिम समुदाय का सूपड़ा साफ

हिमाचल प्रदेश ऑल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी ने इस सूची को लेकर कड़ा एतराज जताया है। ऑल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के मुख्य सलाहकार नसीम दीदान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एडवोकेट शकील अहमद और जिला सिरमौर मुस्लिम कमेटी के प्रधान कैप्टन सलीम अहमद ने संयुक्त रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार को निशाने पर लिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि 71 नामों की लंबी फेहरिस्त में एक भी मुस्लिम चेहरा न होना महज संयोग नहीं, बल्कि सोची.समझी साजिश है। दीदान ने सवाल उठाया कि क्या हिमाचल में कांग्रेस को अब अल्पसंख्यक समाज के वोट और नेतृत्व की जरूरत नहीं रही।

 

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नेतृत्व पर उठे सवालए चेतावनी भी जारी

सोसायटी के नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी लंबे समय से अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन का दावा करती रही है, लेकिन नियुक्तियों में उनकी भागीदारी न होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर इस तरह की अनदेखी जारी रही तो इसका राजनीतिक असर आने वाले समय में देखने को मिल सकता है।

लगातार हो रही अनदेखी का आरोप

मुस्लिम समुदाय से जुड़े प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से न केवल संगठनात्मक स्तर पर, बल्कि विभिन्न बोर्ड और समितियों के गठन में भी उनकी भागीदारी नहीं सुनिश्चित की गई है। इससे समुदाय के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। समुदाय के नेताओं का कहना है कि प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करना राजनीतिक रूप से भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

 

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कई सीटों पर बिगड़ सकता है कांग्रेस का गणित

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो सोसायटी का यह गुस्सा कांग्रेस के लिए आने वाले चुनावों में आत्मघाती साबित हो सकता है। इसका असर खासकर जिला सिरमौर में देखने को मिल सकता है। क्योंकि नाहन और पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की संख्या काफी अधिक है और यहां का मुस्लिम मतदाता हार जीत तय करता है। इसके अलावा शिमला चंबा की भी कई सीटों पर मुस्लिम समुदाय का काफी अधिक प्रभाव है। 

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सियासी दबाव में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

पहले महिलाओं और अब अल्पसंख्यक समुदाय की नाराजगी के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल और बाहरी विरोध आने वाले दिनों में संगठन के लिए चुनौती बन सकते हैं। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस नेतृत्व इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालता है।

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