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April 20, 2026
हिमाचल: नई नवेली दुल्हन ने लाल जोड़े में फौजी पति को दी अंतिम विदाई, 3 माह पहले हुई थी शादी
जिस घर में 3 माह पहले गूंजी थी शहनाई, उसी आंगन में तिरंगे में लिपटी पहुंची बेटे की देह
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चंबा/फरीदाबाद। हाथों की मेहंदी का रंग अभी ठीक से छूटा भी नहीं था, कलाइयों में खनकती चूड़ियों की आवाज अभी कम भी नहीं हुई थी कि सात फेरों के बंधन पर मौत का साया मंडरा गया। फरीदाबाद के साहूपुरा गांव में आज सोमवार को एक ऐसा मंजर था, जिसे देखकर पत्थर दिल भी मोम की तरह पिघल गया।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के बकलोह में प्रशिक्षण के दौरान शहीद हुए 26 वर्षीय जांबाज जवान मोहित की पार्थिव देह जब उनके घर पहुंची तो वहां की चीख.पुकार ने वहां के माहौल को रूह कंपा देने वाला बना दिया। सबसे दर्दनाक दृश्य उस वक्त देखने को मिला, जब उनकी पत्नी लाल जोड़े में बिलखती हुई अपने पति के ताबूत के पास पहुंची। जिसने अभी तीन महीने पहले ही अपने जीवनसाथी के साथ सात फेरे लिए थे, वही आज उसे अंतिम विदाई दे रही थी। हाथों की मेहंदी का रंग भी पूरी तरह फीका नहीं पड़ा था कि उसकी दुनिया उजड़ गई।
नई नवेली दुल्हन ने अपने फौजी पति को लाल जोड़े में ही सैल्यूट कर अंतिम विदाई दी। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को अंदर तक झकझोर गया। लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए और माहौल पूरी तरह भावुक हो उठा। हर कोई इस बलिदान को सलाम कर रहा था, लेकिन पत्नी के दर्द को शब्दों में बयां करना मुश्किल था। मोहित और उसकी पत्नी के बीच का यह अधूरा सफर साहूपुरा के इतिहास में कभी न भूलने वाला जख्म दे गया।

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शहीद जवान 26 वर्षीय मोहित का आज सोमवार को उनके पैतृक गांव साहूपुरा में अंतिम संस्कार किया गया। उससे पहले उनकी पैतृक देह सेना के जवान उनके घर लेकर पहुंचे। जहां परिवार को अंतिम दर्शन करवाए गए। अंतिम दर्शन के बाद जवान का पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के बड़े भाई ने मोहित की चिता को मुखाग्नि दी, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर छा गई। इस दौरान भारी संख्या में पहुंच कर लोगांे ने अपने जवान को अंतिम विदाई दी। बता दें कि श्मशाघाट पर लोगों की इतनी भीड़ एकत्रित हो गई थी, कि वहां अतिरिक्त पुलिस लगानी पड़ी।
जानकारी के अनुसार जवान हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले स्थित बकलोह सैन्य छावनी के स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण ले रहे थे। 18 अप्रैल को बॉक्सिंग अभ्यास के दौरान उनके सिर के पास गंभीर चोट लग गई। उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उन्होंने शनिवार देर शाम को दम तोड़ दिया।

26 वर्षीय मोहित 8 साल पहले भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। वह 29 पैरा इकाई से जुड़ा हुआ था और इस समय वह आगरा में तैनात था। बताया जा रहा है कि मोहित 40 दिन की स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग के लिए 5 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित बकलोह सैन्य छावनी पहुंचे थे। तीन भाइयों में सबसे छोटा मोहित बचपन से ही फौजी वर्दी पहनने का सपना देखता था। पहली ही कोशिश में उसने सेना में अपनी जगह बना ली थी। परिवार को अपने बेटे की शहादत पर गर्व तो है, लेकिन उस छोटे बेटे को खोने का गम भी अथाह है जिसने अभी गृहस्थ जीवन की दहलीज पर कदम ही रखा था।
मोहित की शादी इसी साल फरवरी में हुई थी। 3 फरवरी 2026 को मोहित ने गांव शाहपुर कलां की रहने वाली युवती के साथ सात फेरे लिए थे और अपने नए जीवन की शुरूआत की थी। लेकिन महज तीन माह बाद ही जिस आंगन में शहनाई गूंजी थी, उस आंगन में तीन माह बाद ही जवान की तिरंगे में लिपटी अर्थी पहुंची। जिसे देख कर हर आंख नम हो गई।

शहीद मोहित की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। मोहित अमर रहे' और 'भारत माता की जय' के नारों से पूरा फरीदाबाद गूंज उठा। अंतिम विदाई देने के लिए केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा सहित कई दिग्गज पहुंचे। पैतृक गांव साहूपुरा के श्मशान घाट में मोहित के बड़े भाई ने उसे मुखाग्नि दी।