मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत शनिवार को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में अधिकारियों पर जमकर बरसीं। विकास कार्यों के लिए जारी राशि का समय पर उपयोग न होने और पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से सांसद का पारा चढ़ गया।
बैठक के दौरान कंगना रनौत के तेवर इतने सख्त नजर आए कि उन्होंने अधिकारियों से दो टूक कहा कि बैठकें सिर्फ कागजी औपचारिकता पूरी करने के लिए न की जाएं। अगर हर बैठक में वही सुझाव और वही जवाब दोहराए जाते रहें और जमीन पर काम नजर न आए तो ऐसी बैठकों का कोई मतलब नहीं है।
उन्होंने अधिकारियों को यहां तक कह दिया कि “लोग मुझे निठल्ला कहते हैं, लेकिन मैं फंड उपलब्ध करवा रही हूं और आप उसे खर्च तक नहीं कर पा रहे।” सांसद ने अधिकारियों से साफ कहा कि जनता को परिणाम चाहिए, केवल आश्वासन और जुमले नहीं।
‘हर दिशा बैठक में वही जुमले सुन रही हूं’
बैठक में अधिकारियों द्वारा दिए जा रहे जवाबों पर नाराजगी जताते हुए कंगना ने कहा कि हर दिशा बैठक में उन्हें एक जैसे जुमले सुनने को मिल रहे हैं। बार-बार वही समस्याएं सामने आती हैं, वही सुझाव दिए जाते हैं और फिर अगली बैठक में भी वही स्थिति दोहराई जाती है। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि जब पिछली बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे तो उन पर काम क्यों नहीं हुआ। कंगना ने सख्त लहजे में कहा कि “बार-बार वही सुझाव आते हैं, उन पर अमल नहीं होता। आपके कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। आखिर सबका वक्त क्यों बर्बाद किया जा रहा है?”
यह भी पढ़ें: हिमाचल में बादल फटने से मची तबाही: फ्लैश फ्लड से 4 हाइड्रो प्रोजेक्ट को नुकसान; लोगों में मची अफरा तफरी
11 करोड़ रुपये का फंड, फिर भी काम अधूरे क्यों?
सांसद ने विकास कार्यों के लिए उपलब्ध करवाई गई राशि के उपयोग पर विशेष नाराजगी जताई। बैठक में सामने आया कि पिछले करीब दो वर्षों में जारी लगभग 11 करोड़ रुपये की राशि का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाया। कंगना ने कहा कि सांसद का काम विकास कार्यों के लिए फंड उपलब्ध करवाना है, जबकि उस राशि को निर्धारित कार्यों पर खर्च करवाने और काम पूरा कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और अधिकारियों की है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि अगर पैसा उपलब्ध होने के बावजूद काम शुरू नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय करनी होगी।
‘लोग मुझे निठल्ला कहते हैं, आप सिर्फ सैलरी लेने आते हैं’
बैठक में कंगना ने अधिकारियों को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता के बीच उनकी छवि को लेकर सवाल उठाए जाते हैं और लोग उन्हें काम नहीं करने वाला बताते हैं, जबकि वह अपनी तरफ से पूरी क्षमता के साथ विकास कार्यों के लिए प्रयास कर रही हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि “लोग मुझे निठल्ला कहते हैं, लेकिन आप यहां सिर्फ सैलरी लेने आ जाते हैं। कंगना ने स्पष्ट किया कि सांसद द्वारा उपलब्ध करवाए गए फंड का इस्तेमाल न होना केवल विभाग की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर जनता के विकास पर पड़ता है।
यह भी पढ़ें : विजिलेंस ने जमीन फर्जीवाड़े में धरा MLA सुधीर शर्मा का करीबी, 300 रजिस्ट्रियां- 400 कनाल जमीन...
डिफॉल्टरों पर कार्रवाई और जुर्माने की मांग
सांसद ने उन लोगों और एजेंसियों पर भी नाराजगी जताई, जिन्होंने विकास कार्यों के लिए राशि तो ले ली लेकिन काम आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पैसा लेने के बाद काम शुरू नहीं किया है, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए और जुर्माना लगाया जाना चाहिए। उनके अनुसार करीब 30 से 40 फीसदी राशि ऐसे डिफॉल्टरों के पास फंसी हुई है। कंगना ने अधिकारियों से ऐसे मामलों की अलग सूची तैयार करने और प्रत्येक मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
फर्जी एनओसी और कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा
बैठक में कथित तौर पर फर्जी एनओसी और अनुमतियों से जुड़े मामलों पर भी सांसद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को केवल कागजों में आगे बढ़ाने की बजाय वास्तविक रूप से जमीन पर उतारना होगा। भू-अधिग्रहण, विभिन्न अनुमतियों और एनओसी के कारण अटके कार्यों की अलग-अलग सूची बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक लंबित कार्य के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया। इससे यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन सा काम किस अधिकारी या विभाग के स्तर पर और किस कारण से लंबित है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में अब नहीं चलेगी निजी स्कूल संचालकों की मनमानी, नियम तोड़े तो लगेगा एक लाख रुपए जुर्माना
‘जो जिम्मेदार अधिकारी हैं, वे खड़े हों’
बैठक के दौरान कंगना के तेवर उस समय और तल्ख हो गए जब उन्होंने जिम्मेदारी तय करने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन लोगों के जिम्मे संबंधित विकास कार्य हैं, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। सांसद ने अधिकारियों को संकेत दिया कि अब केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि राशि वापस करने के निर्देश दे दिए गए हैं। जब तक पैसा सरकारी खाते में वापस नहीं आता, तब तक काम को अधूरा ही माना जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी।
‘इट बिकम ए ब्लडी जोक’, कंगना का फूटा गुस्सा
बैठक में फंड के इस्तेमाल और लगातार लंबित कामों पर नाराज कंगना ने अंग्रेजी में “इट बिकम ए ब्लडी जोक” कहकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि स्थिति ऐसी हो गई है कि वह राष्ट्रीय मीडिया में भी इस मुद्दे को लेकर खुलकर बात नहीं कर पा रही हैं। कंगना ने कहा कि केंद्र और सांसद स्तर से राशि उपलब्ध करवाने के बावजूद यदि उसे समय पर विकास कार्यों में नहीं लगाया जाता तो इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में दो लोगों की देह मिलने से मचा हड़कंप, एक खड्ड किनारे तो दूसरा ट्रक में पड़ा मिला
केंद्र की योजनाओं को लेकर प्रदेश सरकार पर भी निशाना
दिशा बैठक के बाद कंगना ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की योजनाओं को हिमाचल में अपेक्षित तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार और अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता की शिकायतें उनके पास लगातार पहुंच रही हैं।
कंगना ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की योजनाओं और विकास कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश की जाती है, लेकिन यदि विकास कार्यों में बाधाएं हैं तो उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी पर भी सवाल
कंगना ने दिशा कमेटी की बैठकों में कांग्रेस विधायकों की कथित गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर की कई समस्याओं की जानकारी विधायकों को होती है और यदि वे बैठकों में शामिल होकर अपनी बात नहीं रखेंगे तो कई समस्याओं का समाधान मुश्किल होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के मुद्दों पर राजनीति करने की बजाय सभी जनप्रतिनिधियों को मिलकर काम करना चाहिए।
अब कागज नहीं, जमीन पर चाहिए काम का हिसाब
दिशा बैठक में कंगना का पूरा फोकस एक ही बात पर रहा—फंड उपलब्ध होने के बाद विकास कार्य जमीन पर क्यों नहीं दिख रहे? उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाली बैठकों में केवल पुरानी रिपोर्ट दोहराने से काम नहीं चलेगा। हर लंबित योजना की स्थिति, खर्च हुई राशि, बची राशि, देरी का कारण और उसे पूरा करने की समयसीमा स्पष्ट करनी होगी।
