शिमला। अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों में रहने वाली भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने ही बयान को लेकर सियासी घेराबंदी का सामना कर रही हैं। नई पीढ़ी के युवाओं को लेकर दिए गए 'कीड़े-मकोड़े', 'गटर जेनरेशन' और 'गटर छाप' जैसे विवादित शब्दों ने अब हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। विक्रमादित्य सिंह ने कंगना के बयान को युवाओं का अपमान बताते हुए उन पर तीखा हमला बोला और एक निर्वाचित सांसद को अपनी भाषा की मर्यादा बनाए रखने की नसीहत तक दे डाली।
युवाओं के खिलाफ जहर उगलना शोभा नहीं देता
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश के युवाओं के लिए इस तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिस युवा शक्ति के दम पर देश आगे बढ़ रहा है, उसी पीढ़ी को 'कीड़े-मकोड़े' और 'गटर छाप' कहना किसी भी जनप्रतिनिधि की गरिमा के अनुरूप नहीं है। विक्रमादित्य ने तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर कंगना ऐसे शब्द कहां से लेकर आती हैं? क्या उन्हें इस तरह की भाषा व्हाट्सएप पर मिलती है? उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपने शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए।
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जेपी नड्डा का भी लिया नाम
विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों को कंगना 'गटर छाप' कह रही हैं, उन्हीं युवाओं और नागरिकों के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा संवाद करते हैं। ऐसे में कंगना का बयान भाजपा की सोच पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सांसद को अपनी जिम्मेदारी और संवैधानिक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
तीन दिन पहले की पोस्ट से शुरू हुआ पूरा विवाद
पूरा विवाद कंगना रनौत की उस सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और नई पीढ़ी, विशेषकर Gen-Z, के व्यवहार पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कुछ वीडियो देखने के बाद प्रदर्शनकारियों के आचरण और परवरिश पर सवाल उठाए और 'गटर जेनरेशन', 'गटर छाप' तथा 'कीड़े-मकोड़े' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
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इसी पोस्ट में उन्होंने आधुनिक महिलाओं पर भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि कुछ लोग स्वतंत्रता का अर्थ केवल नशे, शराब और गैर-जिम्मेदार जीवनशैली से जोड़ रहे हैं। उनके इन बयानों के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी बहस शुरू हो गई।
हिमाचल में गरमाई सियासत
कंगना के बयान के बाद हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह बयान प्रदेश सहित पूरे देश के युवाओं का अपमान है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंडी लोकसभा चुनाव के बाद यह पहला बड़ा अवसर है जब कंगना रनौत और उनके चुनावी प्रतिद्वंद्वी रहे विक्रमादित्य सिंह किसी मुद्दे पर सीधे आमने-सामने नजर आए हैं।
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पेलेट गन के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
विक्रमादित्य सिंह ने हालिया प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे शांतिप्रिय राज्य में विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए इस तरह के कदम लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। सरकार और प्रशासन को संवेदनशील तरीके से हालात संभालने चाहिए।
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राजनीतिक संदेश भी दिया
शिमला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विक्रमादित्य सिंह ने शिमला ग्रामीण और चौपाल विधानसभा क्षेत्र के करीब 70 भाजपा समर्थकों को कांग्रेस की सदस्यता भी दिलाई। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कांग्रेस की नीतियों से प्रभावित होकर लोग लगातार पार्टी से जुड़ रहे हैं।
